भारत सरकार ने उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए 'राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति (NIPU)-2026' को मंजूरी दी है। इस नीति का उद्देश्य देश में नए गैस-आधारित यूरिया संयंत्रों को बढ़ावा देना और आयात पर निर्भरता को कम करना है।
मुख्य बातें
- NIPU-2026 का लक्ष्य यूरिया उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है।
- नीति में निवेश को आकर्षित करने के लिए रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) का एक निश्चित बैंड (12%-16%) पेश किया गया है।
- विदेशी मुद्रा के जोखिम को कम करने के लिए निश्चित लागत को चार साल बाद भारतीय रुपये में बदलने का प्रावधान है।
- सरकार एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) और नैनो यूरिया के माध्यम से उर्वरकों के संतुलित उपयोग को बढ़ावा दे रही है।
हाल ही में पश्चिम एशिया में तनाव और एल नीनो के कारण उर्वरकों की मांग में वृद्धि के बीच, कैबिनेट समिति ने राष्ट्रीय यूरिया निवेश नीति (NIPU)-2026 को मंजूरी दी है। यह कदम भारत की कृषि सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि वर्तमान में देश यूरिया के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर है।
नीति में प्रमुख बदलाव और निवेश प्रोत्साहन
NIPU-2026 मौजूदा नीति की तुलना में अधिक पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल है। नई नीति के तहत, पारदर्शिता बढ़ाने के लिए निश्चित और परिवर्तनीय लागतों को अलग किया गया है। इसके अलावा, निवेशकों को आकर्षित करने के लिए 12% से 16% के बीच रिटर्न ऑन इक्विटी (RoE) का एक बैंड निर्धारित किया गया है। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव विदेशी मुद्रा जोखिम का प्रबंधन है, जिसके तहत चार वर्षों के बाद मौजूदा विनिमय दरों के आधार पर निश्चित लागत को भारतीय रुपये में परिवर्तित किया जाएगा।
BozokMedia विश्लेषण: यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यूरिया की कीमतों में वैश्विक अस्थिरता सीधे भारतीय किसानों की लागत और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित करती है। घरेलू उत्पादन बढ़ाकर, भारत न केवल विदेशी मुद्रा बचाएगा, बल्कि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के झटकों से भी खुद को सुरक्षित रखेगा।
स्वदेशी उत्पादन क्षमता में वृद्धि केवल एक आर्थिक लक्ष्य नहीं, बल्कि भारत की खाद्य संप्रभुता की रक्षा के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उत्पादन क्षमता
भारत ने पहले भी 2012, 2013 और 2014 में यूरिया क्षेत्र के लिए नीतियां लागू की थीं। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप, देश की उत्पादन क्षमता 2014-15 में 207.54 LMT से बढ़कर 2026-27 तक 269.42 LMT होने का अनुमान है। वर्तमान में देश में 33 परिचालन इकाइयां हैं जो कुल 269.42 लाख मीट्रिक टन की क्षमता रखती हैं।
| विवरण | 2024-25 | 2025-26 |
|---|---|---|
| कुल उर्वरक सब्सिडी (करोड़ ₹) | 1,77,162.06 | 2,17,281.10 |
| यूरिया सब्सिडी (करोड़ ₹) | 1,24,319.50 | 1,42,175.74 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1. NIPU-2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य देश में गैस-आधारित यूरिया उत्पादन इकाइयों की स्थापना के लिए निवेश को प्रोत्साहित करना और आयात पर निर्भरता कम करना है।
2. सरकार उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए क्या कर रही है?
सरकार एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM) को बढ़ावा दे रही है, जो जैविक और रासायनिक उर्वरकों के वैज्ञानिक मिश्रण पर जोर देता है।