सांसद दुरै वैको ने संस्कृति एवं पर्यटन मंत्रालय से श्रीरंगम मंदिर को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने का आग्रह किया। 2014 में टेंटेटिव लिस्ट में जुड़ने के बाद से अभी तक नामांकन दस्तावेज़ नहीं भेजा गया है।

मुख्य बिंदु

  • श्रीरंगम मंदिर 2014 में UNESCO टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हुआ
  • अब तक आधिकारिक नामांकन फ़ाइल UNESCO को नहीं भेजी गई
  • दुरै वैको ने तुरंत कार्रवाई की मांग की

त्रिची सांसद दुरै वैको ने शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की और श्रीरंगम के श्रीरंगनाथस्वामी मंदिर को UNESCO विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामांकित करने का त्वरित कदम उठाने का आग्रह किया।

यह मंदिर भारत के सबसे बड़े कार्यरत हिंदू मंदिर‑समूहों में से एक है और 108 “दिव्य स्थानों” में प्रमुख स्थान रखता है। 2014 में केंद्र द्वारा प्रस्तुत टेंटेटिव लिस्ट में इसका नाम शामिल था और 2017 में इसे ऐतिहासिक संरक्षण के लिए UNESCO अवार्ड ऑफ मेरिट से सम्मानित किया गया।

UNESCO की विश्व धरोहर संधि के तहत किसी सांस्कृतिक सम्पदा को मान्यता मिलने के लिये कम से कम एक मानदंड को पूरा करना आवश्यक है। श्रीरंगम मंदिर ने चार मानदंड (वास्तु‑शिल्प उत्कृष्टता, सतत धार्मिक परम्परा, ऐतिहासिक महत्व और सांस्कृतिक प्रभाव) को सिद्ध किया है, जिससे यह विश्व धरोहर के लिए सबसे मजबूत उम्मीदवार बनता है।

दुरै वैको ने महाबोधि मंदिर की सफल नामांकन प्रक्रिया को मॉडल बनाकर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), तमिलनाडु सरकार, हिंदू धर्म एवं चैरिटेबल एण्डाउमेंट्स विभाग, UNESCO विशेषज्ञों और अन्य विरासत पेशेवरों के साथ मिलकर एक व्यापक नामांकन दस्तावेज़ तैयार करने का प्रस्ताव रखा।

यदि यह मंदिर विश्व धरोहर सूची में सम्मिलित हो जाता है तो यह राष्ट्रीय गौरव के साथ‑साथ संरक्षक उपायों को सुदृढ़ करेगा, शैक्षणिक अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा और सतत सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देगा।

विशेषताश्रीरंगम मंदिरमहाबोधि मंदिर
टेंटेटिव लिस्ट में वर्ष20142002
नामांकन फ़ाइल प्रस्तुतनहीं2006
UNESCO पुरस्कार2017 (अवॉर्ड ऑफ मेरिट)2008 (संरक्षण पुरस्कार)

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that securing UNESCO status for Srirangam could catalyze a 30‑40% increase in heritage tourism revenue for Tamil Nadu, while also setting a precedent for fast‑tracking other Indian religious sites.

"श्रीरंगम का विश्व धरोहर दर्जा न केवल भारत की सांस्कृतिक धरोहर को सुरक्षित करेगा, बल्कि वैश्विक शैक्षणिक सहयोग को भी सुदृढ़ करेगा," डॉ. रमेश कुमार, यूनेस्को विरासत विशेषज्ञ ने कहा।
Did You Know?: श्रीरंगम मंदिर का परिसर 25 हेक्टेयर से अधिक में फैला है, जो इसे विश्व का सबसे बड़ा कार्यरत हिंदू मंदिर बनाता है।

Frequently Asked Questions

UNESCO विश्व धरोहर नामांकन प्रक्रिया क्या है? यह प्रक्रिया टेंटेटिव लिस्ट में जोड़ने, विस्तृत नामांकन फ़ाइल तैयार करने और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों द्वारा मूल्यांकन के चरणों से गुजरती है।

विश्व धरोहर दर्जा मिलने से मंदिर को क्या लाभ होगा? इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संरक्षण निधि, अनुसंधान सहयोग और सतत पर्यटन सुविधाएँ प्राप्त होंगी।