अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने बताया कि 6.17 लाख से अधिक वक्फ संपत्तियों को उमीड सेंट्रल पोर्टल‑2025 पर सत्यापित और मंज़ूर किया गया है, जिससे धार्मिक अंतरण रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण तेज़ हुआ है।
मुख्य बिंदु
- 6,17,102 वक्फ संपत्तियों की पुष्टि हुई
- उमीड पोर्टल वक्फ की पूरी जीवन‑चक्र प्रबंधन करता है
- बाकी संपत्तियों को अपलोड या अस्वीकृति प्रक्रिया में है
उमीड पोर्टल का महत्व
विधानसभा में अल्ला इंडिया त्रिनामूल कांग्रेस की सांसद सजदा अहमद द्वारा पूछे गए प्रश्न का उत्तर देते हुए, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरन रिजीजू ने बताया कि 7,99,978 वक्फ संपत्तियों को पोर्टल पर अपलोड करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
जुलाई १७, २०२६ तक 6,17,102 संपत्तियों को सत्यापित और मंज़ूर किया गया, जबकि 91,623 संपत्तियों को अपलोड के विभिन्न चरणों में रखा गया और 91,253 संपत्तियों को सत्यापन के दौरान अस्वीकृत किया गया।
उमीड सेंट्रल पोर्टल‑2025, 1995 के उमीड अधिनियम के तहत विकसित एक वैध पोर्टल है, जो पंजीकरण, सत्यापन, सर्वेक्षण, परिवर्तन, वार्षिक लेखा‑ऑडिट और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को समेटे हुए है।
वामसी पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार, भारत में कुल 8.72 लाख वक्फ संस्थान 30 राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों में फैले हैं, जो 38 लाख एकड़ से अधिक भूमि को कवर करते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि वक्फ संपत्तियों का डिजिटल रिकॉर्ड न केवल पारदर्शिता बढ़ाता है, बल्कि अनधिकृत लेन‑देन को रोककर धार्मिक निधियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करता है।
"डिजिटलीकरण से वक्फ संपत्तियों की निगरानी आसान होगी और उनका सही उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा," कहते हैं संपत्ति प्रबंधन विशेषज्ञ डॉ. रा. सलीम.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: अपलोड में देरी वाले वक्फ बोर्डों को आगे क्या कदम उठाने चाहिए?
उत्तर: उन्हें अतिरिक्त छह महीने का विस्तार प्राप्त करने के लिए संबंधित वक्फ ट्राइब्यूनल या न्यायालय से अनुमति लेनी होगी।
प्रश्न 2: अस्वीकृत संपत्तियों के कारण क्या हैं?
उत्तर: दस्तावेज़ी त्रुटियाँ, भू‑सर्वेक्षण में असंगतियों और वैधता प्रमाणन की कमी प्रमुख कारण हैं।