स्पेशल इन्फ़ॉर्मेशन टीम ने द्वारका ‘काफ़िर’ स्क्रीनशॉट मामले में दूसरे आरोपी डीवाईएफआई नेता रिबेश रामकृष्णन को कोज़ीकोड डिस्ट्रीक्ट क्राइम ब्रांच में 24 जुलाई को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। यह कदम राजनीतिक तनाव और डिजिटल फर्जीवाड़े की जांच को तीव्र करता है।
मुख्य बिंदु
- रिबेश रामकृष्णन को एसआईटी ने कोज़ीकोड में पूछताछ के लिए बुलाया
- वे ‘काफ़िर’ स्क्रीनशॉट केस में दूसरा आरोपी हैं
- जांच 24 जुलाई को शुरू होगी, बैंली शर्तों पर पुनर्विचार जारी
स्पेशल इन्फ़ॉर्मेशन टीम (SIT) ने द्वारका ‘काफ़िर’ स्क्रीनशॉट मामले में दूसरे आरोपी के रूप में नामित डीवाईएफआई नेता रिबेश रामकृष्णन को कोज़ीकोड डिस्ट्रीक्ट क्राइम ब्रांच कार्यालय में 24 जुलाई को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया। यह नोटिस पिछले दिन के आरोपपत्र के बाद आया, जिसमें रिबेश को नई आपराधिक धारा में जोड़ा गया।
इस केस में मूल रूप से एक फर्जी स्क्रीनशॉट बनाया गया था, जिसमें 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान लीड डेमोक्रेटिक फ्रंट के उम्मीदवार के के.के. शैलजा को ‘काफ़िर’ कहा गया था। यह सामग्री विभिन्न लेफ्ट‑विंग व्हाट्सएप समूहों और फेसबुक पेजों पर तेज़ी से फैली, जिससे सामाजिक तनाव उत्पन्न हुआ।
जांच टीम ने बताया कि पहले गिरफ्तार जिथिन भास्करन ने यह फर्जी स्क्रीनशॉट तैयार किया था और इसे रिबेश को भेजा। रिबेश ने इसे ‘रेड एन्क्लेव’ नामक व्हाट्सएप समूह में साझा किया, जिससे यह अन्य समूहों में फिर से फैला। जिथिन ने डिजिटल सबूत मिटाने के लिए अपने मोबाइल को रीसेट किया था, पर यह प्रयास जांच में विफल रहा।
वडाकरा ज्यूडिशियल फर्स्ट क्लास मैजिस्ट्रेट कोर्ट ने जिथिन के खिलाफ बंधक रद्द करने की एसआईटी की याचिका को अस्वीकृत किया था। कोर्ट ने कहा कि जिथिन ने बंधक शर्तों का उल्लंघन किया है, क्योंकि वह रिहा होने के बाद कई स्वागत समारोहों में भाग ले रहा था।
यह मामला न केवल डिजिटल फर्जीवाड़े को उजागर करता है, बल्कि राजनैतिक ध्रुवीकरण और धार्मिक भावनाओं के दुरुपयोग को भी दर्शाता है। ऐसी घटनाएँ चुनावी माहौल को अस्थिर कर सकती हैं और सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि इस तरह की डिजिटल फर्जीवाड़ा अभियानों का प्रभाव न केवल स्थानीय राजनीति तक सीमित रहता है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सामाजिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देता है। समय पर जांच और पारदर्शिता ही इस खतरनाक प्रवृत्ति को रोक सकती है।
"डिजिटल प्रमाणों की जांच में तकनीकी विशेषज्ञता और राजनीतिक संवेदनशीलता दोनों की आवश्यकता होती है," कहता है कानूनी विश्लेषक प्रिया सिंह।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: रिबेश रामकृष्णन को क्यों गिरफ्तार किया गया?
उत्तर: वे ‘काफ़िर’ स्क्रीनशॉट के पुनःप्रसारण में शामिल पाए गए, जिससे उन्हें दूसरे आरोपी के रूप में नामित किया गया।
प्रश्न 2: क्या इस मामले में किसी अन्य पार्टी के सदस्य शामिल हैं?
उत्तर: प्रारंभिक जांच में मुस्लिम स्टूडेंट्स फेडरेशन के सक्रियकों पर आरोप लगे थे, पर आगे की जाँच में सीपीआई(एम) और डीवाईएफआई के सदस्य भी संलिप्त पाए गए।