कर्नाटक हाई कोर्ट ने विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) की समय सीमा बढ़ाने की याचिका की सुनवाई को 28 जुलाई तक टाल दिया। याचिकाकर्ताओं ने मतदान सूची में संभावित हटाए जाने वाले नागरिकों के लिए सामाजिक कल्याण योजनाओं को न हटाने की भी मांग की है। यह निर्णय राज्य की चुनावी प्रक्रिया और सामाजिक सुरक्षा पर गहरा असर डाल सकता है।

मुख्य बिंदु

  • सुनवाई 28 जुलाई तक स्थगित
  • हर मतदान केंद्र पर कार्यात्मक मतदान सुविधा केंद्र की मांग
  • सामाजिक कल्याण योजनाओं को हटाने से रोकने की याचिका

कर्नाटक हाई कोर्ट ने 28 जुलाई तक विशेष तीव्र पुनरावलोकन (SIR) की समय सीमा बढ़ाने की याचिका की सुनवाई को स्थगित कर दिया। यह याचिका लेखक देवानुरा महादेवा, इतिहासकार रामचंद्र गुहा, रिटायर्ड मेजर जनरल एस.जी. वोबटकरे और पूर्व उपकुलपति सबिहा भूमिगौड़ा द्वारा दायर की गई थी।

विचाराधीन याचिका में चुनाव आयोग (ECI) को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे प्रत्येक चरण को एक महीने से तीन महीने तक बढ़ा दें, साथ ही प्रत्येक मतदान बूथ पर कार्यात्मक मतदाता सुविधा केंद्र स्थापित करने का आदेश दें। वर्तमान केंद्रों की अपर्याप्तता को उजागर किया गया।

याचिकाकर्ताओं ने ECI को एक स्पष्ट मानदंड प्रकाशित करने का आग्रह किया है जिससे ‘तर्कसंगत विसंगति’ जैसे छोटे वर्तनी या आयु त्रुटियों के कारण नाम को बिना पूर्व सूचना के ड्राफ्ट सूची से हटाया न जाए। वे यह भी चाहते हैं कि ‘अन्य’ श्रेणी में शामिल मतदाताओं को हटाने से पहले विस्तृत कारण बताकर सूचित किया जाए।

साथ ही, राज्य सरकार को निर्देश देने की मांग है कि SIR प्रक्रिया के बाद अंतिम मतदाता सूची में न शामिल हुए व्यक्तियों के सामाजिक कल्याण योजनाओं को नहीं हटाया जाए। यह कदम सामाजिक सुरक्षा और चुनावी सहभागिता के बीच संतुलन बनाने के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कर्नाटक में SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदान सूची में त्रुटियों को दूर करना और चुनावी पारदर्शिता बढ़ाना है। पिछले चुनावों में कई बार नाम हटाने के कारण सामाजिक सेवाओं से वंचित होने की शिकायतें दर्ज हुई थीं, जिससे इस याचिका की मांगों को सुदृढ़ समर्थन मिला है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that delaying the SIR deadline could affect over 18 लाख संभावित मतदाताओं, जिससे चुनावी परिणामों की वैधता और सामाजिक कल्याण योजनाओं की पहुँच दोनों पर प्रभाव पड़ेगा।

"मतदाता सूची की शुद्धता और सामाजिक सुरक्षा का संतुलन लोकतंत्र की नींव है," एक चुनावी विशेषज्ञ ने कहा।
Did You Know?: कर्नाटक में 2024 के SIR में AI तकनीक ने 6.41 लाख अनियमितताओं की पहचान की थी।

Frequently Asked Questions

  • क्या SIR विस्तार का निर्णय अंतिम होगा? कोर्ट अभी तक अंतिम निर्णय नहीं ले रहा है; यह सुनवाई के बाद तय होगा।
  • सामाजिक कल्याण योजनाओं को न हटाने का क्या प्रभाव पड़ेगा? यह सुनिश्चित करेगा कि मतदाता सूची से बाहर हुए नागरिक भी आवश्यक सरकारी सेवाओं का लाभ उठा सकें।