मध्य प्रदेश विधानसभा ने 21 जुलाई को समान नागरिक संहिता (UCC) पारित कर ली। इस विधेयक में बहुपत्नी प्रथा, निकाह हलाला को अपराध घोषित किया गया और साथ‑रहने वाले रिश्तों की पंजीकरण अनिवार्य की गई।

मुख्य बिंदु

  • बहुपत्नी और निकाह हलाला को प्रतिबंधित किया गया
  • विवाह‑तलाक तथा निरस्त्रीकरण की पंजीकरण अनिवार्य
  • साथ‑रहने वाले रिश्तों को एक माह में पंजीकृत करना होगा

विवाह और तलाक के प्रमुख प्रावधान

विधेयक के तहत सभी समुदायों को विवाह, तलाक और निरस्त्रीकरण को 60 दिनों के भीतर ऑनलाइन या स्थानीय पंजीकार द्वारा दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। यह उपाय महिलाओं को अलिमनी और कानूनी सुरक्षा प्रदान करने के लिए है। बहुपत्नी प्रथा को पूरी तरह प्रतिबंधित कर केवल एक जीवित जीवनसाथी को ही वैध माना गया है। निकाह हलाला को आपराधिक दंडनीय माना गया है, जिससे इस प्रथा को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।

साथ‑रहने वाले रिश्ते की पंजीकरण

राज्य में रहने वाले या बाहर रहने वाले किसी भी जोड़े को साथ‑रहने वाले रिश्ते की घोषणा स्थानीय रजिस्ट्रार को रिश्ते शुरू होने के एक महीने के भीतर देनी होगी। यदि कोई साथी 21 वर्ष से कम आयु का है, तो यह सूचना उसके अभिभावकों और स्थानीय पुलिस को भेजी जाएगी। इस पंजीकरण में विफलता पर तीन महीने तक की जेल या 10,000 रुपये जुर्माना हो सकता है।

वंशानुक्रम और विरासत में नया स्वरूप

नए कोड के तहत सभी बच्चों को ‘अवैध’ शब्द से मुक्त कर समान कानूनी स्थिति दी गई है, चाहे वे वैवाहिक या गैर‑वैवाहिक, जैविक, दत्तक या सरोगेसी से हों। उत्तराधिकार कानून लिंग‑निरपेक्ष बनाकर महिलाओं को समान अधिकार प्रदान किए गए हैं, जिससे पारिवारिक संपत्ति का वितरण अधिक न्यायसंगत होगा।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

उत्तरी भारत के कई बीजेडपी‑शासित राज्यों—उत्तarakhand, गुजरात और असम—में पहले ही समान नागरिक संहिता लागू की जा चुकी है। मध्य प्रदेश सरकार ने इन राज्यों के सफल कार्यान्वयन को अध्ययन कर अपना विधेयक तैयार किया, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर समान नागरिक संहिता की दिशा में एक प्रमुख कदम माना जा रहा है।

राज्यमुख्य प्रावधानपंजीकरण अनिवार्य
मध्य प्रदेशबहुपत्नी प्रतिबंध, निकाह हलाला, साथ‑रहने वाले पंजीकरणहां
उत्तarakhandसमान विवाह कानून, उत्तराधिकार समानताहां
गुजराततलाक के स्पष्ट कारण, महिला संरक्षणहां
असमसभी समुदायों में एकसमान विवाह पंजीकरणहां

क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia analysis shows that this legislation could set a precedent for other Indian states, pushing the nation closer to a truly uniform civil code and reducing gender‑based legal disparities.

"UCC in Madhya Pradesh marks a watershed moment for gender equity in personal law," says legal scholar Dr. Anjali Mehta.
Did You Know?: भारत में केवल चार राज्य ही अब तक पूर्ण समान नागरिक संहिता लागू कर चुके हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या बहुपत्नी प्रथा पर दंड लगाया जाएगा?
उत्तर: हाँ, बहुपत्नी प्रथा अब अपराध माना गया है और दंडनीय है।

प्रश्न 2: साथ‑रहने वाले रिश्ते की पंजीकरण में देर करने पर क्या दंड है?
उत्तर: एक माह से अधिक देर करने पर तीन महीने की जेल या 10,000 रुपये जुर्माना हो सकता है।