राज्यसभा ने मानसून सत्र के छठे दिन कोई भी बिल नहीं सुना और सत्र को स्थगित कर दिया। विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह से छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई के लिए माफ़ी की मांग की, जबकि मंत्री किरेन रिज़ी जु ने कांग्रेस से बिल पर चर्चा की अपील की।

मुख्य बिंदु

  • राज्यसभा ने छठे लगातार दिन बिना किसी议案 के सत्र समाप्त किया
  • विरोध ने अमित शाह से छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई की माफ़ी मांगी
  • किरेन रिज़ी जु ने कांग्रेस से सार्वजनिक परीक्षा बिल पर चर्चा की अपील की

सत्र का सिंहावलोकन

27 जुलाई, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित मानसून सत्र के दौरान राज्यसभा ने अपने छठे लगातार दिन कोई भी कार्यवाही नहीं की। प्रिवेंशन ऑफ इन्सल्ट्स टू नेशनल ऑनर (अमेंडमेंट) बिल, 2026 को विचाराधीन रखा गया था, परन्तु विरोधी दलों ने गृह मंत्री अमित शाह से छात्र विरोध पर पुलिस कार्रवाई के लिए सार्वजनिक माफ़ी की मांग की।

बिल पर रोक

दोपहर 2 बजे सभा में प्रवेश के बाद डिप्टी स्पीकर हरिवंश ने गृह मंत्रालय के राज्य मंत्री नित्यानंद राय को राष्ट्रीय गान को राष्ट्रीय गीत की स्थिति देने वाले बिल को पेश करने का आदेश दिया। विपक्षी सांसद प्रमोद तिवारी, जॉन ब्रिटास और तिरुचि शिवा ने क्रमशः पुलिस अत्याचार और संविधान के विरुद्ध होने के कारण आपत्ति जताई। डिप्टी चेयरमैन ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया और बिल को आगे बढ़ाया।

सरकार की अपील

शाम 5:15 बजे पार्लियामेंटरी अफेयर्स मंत्री किरेन रिज़ी जु ने कांग्रेस को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोक) संशोधन बिल, 2026 पर चर्चा करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा, “युवा देश देख रहा है; हमें इस बिल पर चर्चा करनी चाहिए, लेकिन विपक्ष ने हमें रोक दिया है।” कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि चर्चा से पहले गृह मंत्री को बयान देना चाहिए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत के इतिहास में राज्यसभा में लगातार कई दिनों तक कोई कार्यवाही न होना दुर्लभ रहा है। 1999 में भी समान स्थिति देखी गई थी, जब विपक्ष द्वारा कई मोशन दायर किए गए और सत्र कई बार स्थगित हुआ। यह दर्शाता है कि संसद में विरोधी दलों की शक्ति और विधायी प्रक्रिया में तनाव को समझना आवश्यक है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that prolonged adjournments erode public confidence in legislative institutions and may signal deeper political rifts ahead of the upcoming general elections.

“ऐसे मामलों में, लोकतांत्रिक प्रक्रिया की स्थिरता ही राष्ट्र की प्रगति की कुंजी है।”
Did You Know?: राज्यसभा के पहले सत्र में 1952 में केवल 30 दिनों में सभी बिल पारित हो गए थे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या राष्ट्रीय गान को राष्ट्रीय गीत की स्थिति देने वाला बिल अभी भी पारित हो सकता है?
उत्तर: हाँ, यदि विपक्ष अपनी मांगें रखे और कांग्रेस चर्चा के लिए तैयार हो, तो बिल को पुनः विचार किया जा सकता है।

प्रश्न 2: इस सत्र में आगे कौन से प्रमुख बिलों की अपेक्षा है?
उत्तर: विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा सुधार और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े कई बिल इस मानसून सत्र में पेश किए जा सकते हैं।