जल्दी ही सोनम वांगचुक ने अपने एक्स‑एकाउंट पर घोषणा की कि वह मेडांटा अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं। उन्होंने लद्दाख लौटने से पहले राजघाट में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने का इरादा बताया।
Key Takeaways
- सोनम वांगचुक 27 जुलाई को मेडांटा अस्पताल से डिस्चार्ज हुए
- डिस्चार्ज के बाद राजघाट में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देंगे
- उनकी 26‑दिन की अनिश्चित उपवास समाप्त हुई
डिस्चार्ज की आधिकारिक पुष्टि
गुड़गाँव के मेडांटा अस्पताल ने एक बयान जारी किया कि सोनम वांगचुक को एकीकृत प्रोटोकॉल के तहत इंटर्नल मेडिसिन और क्रिटिकल केयर विभागों में उपचार मिला और वे स्थिर स्थिति में डिस्चार्ज हुए।
वांगचुक की स्वयं की घोषणा
वांगचुक ने अपने X (ट्विटर) खाते पर लिखा, “अन्ततः वह दिन आ गया है जब मैं इस अस्पताल से डिस्चार्ज हो रहा हूँ। आज, यहाँ से निकलने के बाद और लद्दाख लौटने से पहले, मैं राजघाट में बापू को श्रद्धांजलि दूँगा।”
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
वांगचुक ने 28 जून को लद्दाख में जलवायु विरोध के तहत उपवास शुरू किया और 26 दिन तक अनिश्चित उपवास किया। 18 जुलाई को उन्हें सर्फ़दर्जुंग अस्पताल में जबरन ले जाया गया, जहाँ उन्होंने खुद को ‘जैसे हिरासत में’ बताया। दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर उन्हें मेडांटा अस्पताल में स्थानांतरित किया गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that वांगचुक का स्वास्थ्य और उनके उपवास का अंत भारत की जलवायु नीतियों पर व्यापक सार्वजनिक चर्चा को फिर से केंद्रित कर सकता है, जिससे सरकार पर दबाव बढ़ेगा कि वह वास्तविक कदम उठाए।
“सोनम वांगचुक की वापसी न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य की जीत है, बल्कि जलवायु न्याय के संघर्ष में एक नया अध्याय खोलती है,” कहा पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. अंजलि मेहता।
Frequently Asked Questions
- वांगचुक कब तक लद्दाख वापस आएँगे? उन्होंने बताया कि डिस्चार्ज के बाद तुरंत राजघाट जाएंगे और फिर लद्दाख की ओर रुख करेंगे।
- क्या उनका उपवास सरकार को प्रभावित कर पाया? कई विश्लेषकों का मानना है कि उनका दबी हुई आवाज अब राष्ट्रीय स्तर पर सुनाई दे रही है।