सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने कहा कि केवल प्रदर्शन होने के कारण पुलिस को बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। दिल्ली में 20 जुलाई को छात्रों के विरोध पर हुई पुलिस अत्याचार की सुनवाई 28 जुलाई को होगी।
मुख्य बिंदु
- सुप्रीम कोर्ट ने NEET विरोध में पुलिस अत्याचार के मामलों की सुनवाई 28 जुलाई को निर्धारित की।
- मुख्य न्यायाधीश ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन का संवैधानिक अधिकार दोहराया।
- पुलिस को बल प्रयोग से पहले स्पष्ट प्रोटोकॉल अपनाना अनिवार्य किया गया।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत ने सोमवार को कहा कि संविधान शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार सुरक्षित करता है और केवल आंदोलन के कारण पुलिस को बल प्रयोग करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में छात्रों के विरोध के दौरान हुई पुलिस अत्याचार की शिकायतों को 28 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया।
पुलिस की जवाबदेही और सुरक्षा उपाय
न्यायाधीश जॉयमाल्या बाघी ने कहा कि राज्य को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बड़े भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस को पर्याप्त सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए गए थे या नहीं। उन्होंने हेल्मेट और अन्य सुरक्षा गियर की आवश्यकता पर बल दिया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में शांति पूर्ण प्रदर्शन का अधिकार 1975 के आपातकाल के बाद से कई न्यायिक निर्णयों में सुदृढ़ किया गया है। 1992 में सुप्रीम कोर्ट ने "लोकतांत्रिक प्रक्रिया" के हिस्से के रूप में इस अधिकार को मान्यता दी, और तब से यह कई सामाजिक आंदोलनों में प्रमुख सिद्धांत रहा है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this ruling could set a precedent for handling future student protests across India, compelling law enforcement agencies to adopt uniform, less‑violent crowd‑control protocols.
"Any use of force against peaceful demonstrators undermines democratic principles," said constitutional law expert Dr. Ananya Sharma.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट ने NEET विरोध के संबंध में क्या निर्देश दिया?
उत्तर: कोर्ट ने पुलिस अत्याचार के मामलों को 28 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को दोहराया।
प्रश्न 2: पुलिस को प्रदर्शनों में किस तरह के प्रोटोकॉल अपनाने चाहिए?
उत्तर: न्यायालय ने एक समान, स्पष्ट प्रोटोकॉल की मांग की है, जिसमें बल प्रयोग से पहले बातचीत और गैर‑हिंसक उपायों को प्राथमिकता दी जाए।