जल संसाधन विभाग ने मंत्री एन. आनंद के नेतृत्व में नॉन‑गवर्नमेंटल संगठनों और CSR सहयोग से चेन्नई के प्रमुख जलमार्गों की सफाई के लिए एक विशेष डिसिल्टिंग अभियान शुरू किया। यह कदम आने वाले पूर्वोत्तर मानसून से पहले जलधाराओं की क्षमता बढ़ाने और बाढ़ जोखिम कम करने के लिए है।

मुख्य बिंदु

  • मंत्री एन. आनंद ने कोऊम नदी की सफाई का निरीक्षण किया
  • NGO और CSR सहयोग से कई जलमार्गों में डिसिल्टिंग कार्य शुरू
  • पूर्वोत्तर मानसून से पहले सभी कार्य पूर्ण करने का आदेश

तमिलनाडु जल संसाधन विभाग (WRD) ने 27 जुलाई, 2026 को चेन्नई के विभिन्न जलमार्गों में एक विशेष डिसिल्टिंग अभियान का शुभारंभ किया। यह पहल ग्रामीण विकास एवं जल संसाधन मंत्री एन. आनंद ने कोऊम नदी के कोयंबेडु किनारे निरीक्षण करके शुरू की।

NGO एक्सनोरा इंटरनेशनल और कई कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) पहलों के सहयोग से कोऊम, अडयर, बकिंघम नहर और वेलाचरी‑नरयनापुरम जलाशयों में सिल्ट हटाने के काम को दो‑तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। एक्सनोरा के अध्यक्ष सेंटुर पारी ने बताया कि इस बार विभाग की ईंधन सहायता के साथ प्रमुख जलमार्ग की सफाई की जा रही है।

मंत्री आनंद ने यातायात जाम से बचने के लिये दोपहिया वाहन से यात्रा की और बाद में ओक्कियाम मडुवु पर भी कार्य का निरीक्षण किया। जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव सत्यब्रत साहू और कई निर्वाचित प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

नगर के नागरिक समूह कोरत्तुर एरी संरक्षण लोगों की आंदोलन (KAPMI) ने कोरत्तुर जलाशय को पक्षी अभयारण्य घोषित करने और व्यापक पुनरुद्धार की मांग की। उन्होंने जलमार्गों में सीवेज प्रदूषण और कचरा dumping की समस्या को हल करने के लिये एक अंतर विभागीय कोऑर्डिनेशन समिति की भी मांग की।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले वर्ष, चेन्नई में भारी बाढ़ से बचाव के लिए विभाग ने लगभग 38 करोड़ रुपये खर्च कर वार्षिक डिसिल्टिंग कार्य किए थे। इस प्रकार की पूर्व‑मानसून तैयारियाँ शहर के जल निकायों की क्षमता बनाए रखने में अहम रही हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that proactive desilting not only reduces flood risk but also improves groundwater recharge, directly benefiting Chennai’s rapidly growing population and its industrial zones.

“सिल्ट हटाने से जलधारा की बहाव क्षमता बढ़ती है और बाढ़ की संभावना काफी कम हो जाती है,” जल विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. रमन चक्रवर्ती ने कहा।
Did You Know?: चेन्नई में 2015 की बाढ़ ने लगभग 1500 व्यक्तियों की जान ले ली थी, जिससे नदियों की नियमित रख‑रखाव की आवश्यकता स्पष्ट हुई।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: डिसिल्टिंग कार्य कब तक पूरा होगा?
उत्तर: विभाग ने दो‑तीन महीने के भीतर सभी प्रमुख जलमार्गों को साफ़ करने का लक्ष्य रखा है।

प्रश्न 2: इस अभियान में कौन‑कौन से NGOs शामिल हैं?
उत्तर: एक्सनोरा इंटरनेशनल प्रमुख भागीदार है, तथा कई स्थानीय पर्यावरण समूह भी सहयोग दे रहे हैं।