केरल के राजनैतिक टिप्पणीकार टीजी मोहनदास ने जंतर‑मंतर के छात्र विरोध पर ‘अगर मैं जिम्मेदार होता तो गोली चलाता’ कहकर विवाद खड़ा कर दिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने इस बयान से दूरी बना ली है।

मुख्य बिंदु

  • टीजी मोहनदास ने छात्रों पर गोली चलाने का आदेश देने की बात कही
  • RSS ने इन टिप्पणियों से दूरी बना ली
  • छात्र संगठन AISF ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that ऐसे बयान सामाजिक तनाव को बढ़ा सकते हैं और लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार को खतरे में डालते हैं।

28 जुलाई 2026 को केरल के शिबिमोल में, RSS से जुड़े टिप्पणीकार टीजी मोहनदास ने एक यूट्यूब वीडियो में कहा कि यदि वह जिम्मेदारी संभालता तो पुलिस को छात्रों पर गोली चलाने का आदेश देता। उन्होंने बताया कि कर्फ्यू, चेतावनी और अंत में गोलीबारी से प्रदर्शन को शांत किया जा सकता है।

यह टिप्पणी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के दक्षिण केरल कार्यवाह के द्वारा तुरंत खारिज कर दी गई। उन्होंने कहा कि मोहनदास के विचार निजी हैं और संघ के मूल्यों से बिलकुल असंगत हैं।

मोहनदास ने महिलाओं विरोधियों के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया, जिससे महिलाओं के अधिकार समूहों में भी गुस्सा बढ़ा। इस पर सोशल मीडिया पर व्यापक आलोचना हुई और कई नागरिकों ने हिंसा को भड़काने का आरोप लगाया।

छात्र संगठन All India Students Federation (AISF) ने केरल पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई, यह तर्क देते हुए कि ऐसी बयानबाजी सार्वजनिक सुरक्षा के लिए खतरा है और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।

"ऐसे बयान न केवल लोकतांत्रिक अधिकारों को चोट पहुंचाते हैं, बल्कि सामाजिक शांति को भी बाधित करते हैं," सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अनीता सिंह ने कहा।
Did You Know?: भारत में 1975‑77 के आपातकाल के दौरान भी समान प्रकार के बयान सार्वजनिक विरोध को दबाने के लिए उपयोग किए गए थे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या टीजी मोहनदास की बातें कानूनी तौर पर दंडनीय हैं?

उत्तर: यदि उनकी टिप्पणी को सार्वजनिक रूप से हिंसा भड़काने वाला माना जाए, तो आपराधिक दंडनीयता लागू हो सकती है।

प्रश्न 2: RSS ने इस बयान से दूरी क्यों बनाई?

उत्तर: संघ ने स्पष्ट किया कि मोहनदास के विचार व्यक्तिगत हैं और संघ के आधिकारिक रुख से असंगत हैं।