तेलंगाना सिविल सप्लाई विभाग ने उच्च‑वॉल्यूम धान खरीद केंद्रों में स्वचालित स्टैकर और क्लीनर‑बैगिंग मशीनरी लगाने की योजना बनाई है। यह कदम श्रम की कमी को दूर करके खरीद प्रक्रिया को तेज़ करेगा और अनाज की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करेगा।

मुख्य बिंदु

  • स्वचालित स्टैकर और क्लीनर‑बैगिंग मशीनरी का परिचय
  • हाथ‑काम पर निर्भरता घटेगी, प्रक्रिया तेज़ होगी
  • कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के लिए गोदाम स्थान को प्राथमिकता दी जाएगी

तेलंगाना सिविल सप्लाई विभाग ने उच्च‑वॉल्यूम धान खरीद केंद्रों (PPC) में स्वचालित स्टैकर और एकीकृत क्लीनर‑बैगिंग मशीनरी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है। यह पहल मैनुअल श्रम पर निर्भरता को कम करके खरीद प्रक्रिया को तेज़ करने और परिवहन टर्नअराउंड समय को घटाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

पिछले खरीद चक्र में हलालियों (हामली) की कमी के कारण अनाज की खरीद में देरी हुई थी। इस समस्या को हल करने के लिए, सिविल सप्लाई कमिश्नर एम. स्टीफ़न रवेन्द्र ने कृषि सचिव के. सुरेंद्र मोहन और TG MARKFED के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल राज के साथ एक उच्च‑स्तरीय बैठक में इस mechanization योजना पर चर्चा की।

बैठक में कस्टम मिल्ड राइस (CMR) के लिए लॉजिस्टिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने हेतु कृषि बाजार समितियों (AMC) को समर्पित गोदाम स्थान को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया गया। राज्य के 11 प्राइस मॉनिटरिंग सेंटरों ने कीमतों में कोई असामान्य उतार‑चढ़ाव नहीं दिखाया, जिससे बाजार स्थिरता का संकेत मिलता है।

Historical Background

तेलंगाना ने पिछले दो दशकों में धान की खरीद के लिए सार्वजनिक मंडियों और पीपीसी मॉडल को अपनाया है। प्रारम्भिक चरणों में पूरी प्रक्रिया मैनुअल थी, जिससे समय‑सारिणी में देरी और श्रम लागत में वृद्धि होती थी। 2010‑2020 के बीच कई छोटे‑मोटे स्वचालन प्रयोग किए गए, लेकिन व्यापक कार्यान्वयन नहीं हो पाया। अब नई योजना के साथ, राज्य ने तकनीकी उन्नति को अपनाकर कृषि आपूर्ति श्रृंखला को आधुनिक बनाने का लक्ष्य रखा है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that mechanizing procurement hubs can boost farmer incomes by up to 12% through reduced post‑harvest losses and faster market access. यह कदम न केवल किसानों के लिए लाभकारी है, बल्कि राज्य की खाद्य सुरक्षा और निर्यात क्षमता को भी सुदृढ़ करेगा।

"स्वचालन से न केवल श्रम की कमी दूर होगी, बल्कि अनाज की गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी में भी सुधार होगा," कहा कृषि विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह ने।
Did You Know?: भारत में केवल 15% कृषि उत्पादों को ही पूरी तरह से मशीनरी‑सहायता प्राप्त है, जबकि तेलंगाना इस प्रतिशत को 30% तक बढ़ाने की योजना बना रहा है।

Frequently Asked Questions

  • स्वचालित स्टैकर कैसे काम करेंगे? ये मशीनें धान को स्वचालित रूप से उठाकर स्टैक करती हैं, जिससे मैनुअल लोडिंग की आवश्यकता नहीं रहती।
  • किस किसान को इस नई तकनीक से लाभ होगा? सभी पंजीकृत धान आपूर्तिकर्ता, विशेषकर छोटे एवं सीमांत किसान, तेज़ भुगतान और कम नुकसान से लाभान्वित होंगे।