सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रम्प प्रशासन के नए सेक्शन‑301 टैरिफ़ को चुनौती दी। यह मुक़दमा व्हाइट हाउस की आयात कर नीति को फिर से शुरू करने के प्रयास को रोकने की कोशिश है।
मुख्य बिंदु
- ट्रम्प प्रशासन ने नए सेक्शन‑301 टैरिफ़ लागू किए
- 25 राज्यों ने इन टैरिफ़ को असंवैधानिक कह कर मुक़दमा दायर किया
- टैरिफ़ 10%‑12.5% के बीच हैं और 99% अमेरिकी आयात को प्रभावित करते हैं
पृष्ठभूमि
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प के पहले लागू किए गए आपातकालीन टैरिफ़ को रद्द कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने अस्थायी 10% टैरिफ़ लगाए, जो 24 जुलाई को समाप्त हो गए। अब वह सेक्शन‑301, 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत नए टैरिफ़ लागू कर रहा है।
कानूनी आधार
सेक्शन‑301 राष्ट्रपति को उन देशों पर आयात कर लगाने की शक्ति देता है, जो अनुचित व्यापार प्रथाएँ अपनाते हैं। ट्रम्प ने इस प्रावधान को 2018 में चीन पर बड़े टैरिफ़ लगाने के लिए इस्तेमाल किया था, और वह अब इसे जबरन श्रम वाले सामानों पर लागू कर रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट के बाद प्रशासन फिर से परिवारों और व्यवसायों पर अवैध रूप से टैक्स लगाने की कोशिश कर रहा है।” व्हाइट हाउस प्रवक्ता कुश देसाई ने इसे “अमेरिकी वाणिज्य के लिए अनुचित कार्यों को समाप्त करने का वैध कदम” कहा।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
सेक्शन‑301 का पहला बड़ा उपयोग 1994 में चीन पर किया गया था, जब अमेरिकी कंपनियों ने व्यापार बाधाओं का आरोप लगाया था। तब से यह प्रावधान कई बार व्यापार विवादों में उपयोग किया गया है, लेकिन इस बार यह श्रम अधिकारों के उल्लंघन को लेकर लागू किया गया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the states’ lawsuit could set a precedent limiting executive overreach in trade policy, forcing future administrations to seek congressional approval before imposing large‑scale tariffs.
The use of Section 301 to bypass Supreme Court rulings sets a dangerous precedent.
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ट्रम्प के नए टैरिफ़ किन देशों पर लागू हैं?
उत्तर: ये टैरिफ़ 59 देशों और यूरोपीय संघ पर 10%‑12.5% के बीच दर से लागू हैं, जो अमेरिकी आयात का 99% कवर करते हैं।
प्रश्न 2: राज्य सरकारें इस मुक़दमे से क्या हासिल करना चाहती हैं?
उत्तर: वे चाहते हैं कि टैरिफ़ को निरस्त किया जाए और भविष्य में कोई भी बड़ी आयात कर कांग्रेस की मंजूरी के बिना लागू न हो।