भारतीय अंतरिक्ष भौतिकी की प्रमुख शख्सियत, प्रोफेसर अन्नापुर्णी सुबरमनियम को 2026 का COSPAR विक्रम साराभाई मेडल से सम्मानित किया गया। यह मेडल विकासशील देशों के वैज्ञानिकों को अंतरिक्ष अनुसंधान में उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जाता है।
Key Takeaways
- अन्नापुर्णी सुबरमनियम को 2026 में विक्रम साराभाई मेडल मिला
- वे भारतीय संस्थान ऑफ़ एस्ट्रोफिज़िक्स (IIA) की निदेशक हैं
- यह मेडल केवल चौथे भारतीय को मिला और पहली भारतीय महिला को
फ्लॉरेन्स, इटली में आयोजित 46वें COSPAR वैज्ञानिक सभा के दौरान अन्नापुर्णी सुबरमनियम को COSPAR विक्रम साराभाई मेडल 2026 प्रदान किया गया। यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान विकासशील देशों के वैज्ञानिकों को उनके अंतरिक्ष शोध में असाधारण योगदान के लिए दिया जाता है।
पुरस्कार की पृष्ठभूमि
विक्रम साराभाई मेडल 1990 में स्थापित किया गया था, भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के संस्थापक विक्रम साराभाई के सम्मान में। इसे COSPAR, अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान परिषद और संयुक्त राष्ट्र (UN‑COPUS) के सहयोग से, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के साथ मिलकर प्रदान किया जाता है।
अन्नापुर्णी सुबरमनियम की उपलब्धियाँ
सुबरमनियम स्टार क्लस्टर, निकटस्थ आकाशगंगाओं और उपग्रह‑आधारित उपकरणों के अध्ययन में विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 2015 में लॉन्च किए गए भारत के प्रथम अंतरिक्ष‑टेलिस्कोप ASTROSAT के अल्ट्रा‑वायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (UVIT) के कैलिब्रेशन वैज्ञानिक के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया। साथ ही वह थर्टी मीटर टेलीस्कोप (TMT) परियोजना में भी सक्रिय हैं, जहाँ भारत अंतरराष्ट्रीय कंसोर्टियम का सदस्य है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that सुबरमनियम का यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान भारत के अंतरिक्ष विज्ञान में विश्व स्तर पर पहचान को सुदृढ़ करता है और युवा वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनता है।
यह सम्मान भारत के अंतरिक्ष अनुसंधान में नई दिशा दिखाता है।
Frequently Asked Questions
- विक्रम साराभाई मेडल कौन‑से संस्थान द्वारा प्रदान किया जाता है? यह COSPAR, UN‑COPUS और ISRO के संयुक्त सहयोग से दिया जाता है।
- अन्नापुर्णी सुबरमनियम ने किन प्रमुख परियोजनाओं में योगदान दिया? उन्होंने ASTROSAT के UVIT, थर्टी मीटर टेलीस्कोप और कई स्टार क्लस्टर अध्ययन में प्रमुख भूमिका निभाई है।