जस्टिस एम.एस. लिबरहान का 87 वर्ष की आयु में चंडीगढ़ में निधन हो गया। वह 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस की लंबी जाँच आयोग के प्रमुख थे, जो भारत के इतिहास में सबसे लंबे‑समय तक चला आयोगों में से एक है।
मुख्य बातें
- जस्टिस लिबरहान 87 वर्ष की आयु में चंडीगढ़ में निधन हुए।
- उन्होंने 17 वर्षों तक चलने वाले लिबरहान आयोग का नेतृत्व किया, जो बाबरी मस्जिद विध्वंस की जाँच करता था।
- उनकी न्यायिक ईमानदारी और युवा वकीलों के मार्गदर्शन को व्यापक सम्मान मिला।
जस्टिस मनमोहन सिंह लिबरहान का 3 अगस्त, 2026 को चंडीगढ़ में निधन हो गया। उनका अन्त्यसंस्कार परिवार, मित्रों और विधि जगत के कई प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति में हुआ।
लिबरहान ने पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट में वकालत शुरू की और बाद में पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश, आंध्र प्रदेश तथा मदरास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के पदों पर कार्य किया। 1992 में बाबरी मस्जिद के ध्वस्त होने के बाद स्थापित लिबरहान आयोग को उन्होंने 17 सालों तक संचालित किया, जिससे यह भारत के सबसे लंबे‑समय तक चले आयोगों में से एक बन गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद का ध्वस्त होना भारतीय राजनीति एवं सामाजिक जीवन में गहरा बदलाव लेकर आया। इस घटना के बाद केंद्र सरकार ने एक विशेष आयोग स्थापित किया, जिसका कार्य इस विध्वंस के कारणों, जिम्मेदारियों और कानूनी पहलुओं की गहन जाँच करना था। लिबरहान आयोग ने 2010 में अपनी रिपोर्ट पेश की, जिसमें कई राजनीतिक और सामाजिक पहलुओं को उजागर किया गया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि लिबरहारन की न्यायिक शैली और लंबी जाँच प्रक्रिया ने भारतीय न्याय प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही के महत्व को पुनः स्थापित किया। उनका जीवन न्याय के प्रति समर्पण का प्रतीक बना रहेगा।
"लिबरहारन न्याय के प्रति अटल प्रतिबद्धता और धैर्य का उदाहरण थे, जो आज भी युवा वकीलों को प्रेरित करता है," प्रो. राजीव कौर, कानूनी विद्वान ने कहा।
Frequently Asked Questions
लिबरहारन आयोग की रिपोर्ट कब पेश की गई? रिपोर्ट 2010 में भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत की गई थी।
जस्टिस लिबरहारन ने किन प्रमुख पदों पर कार्य किया? उन्होंने पंजाब‑हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश, आंध्र प्रदेश और मदरास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्य किया।