भारत के मौसमी सत्र में लोकसभा ने बिना किसी बहस के सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या 38 तक बढ़ाने का विधेयक पारित किया। राज्यसभा में विरोधी दलों ने कड़ी आलोचना की और हंगामा हुआ। यह बदलाव न्यायिक कार्यभार को संभालने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मुख्य बिंदु

  • लोकसभा ने सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने का बिल बिना बहस के पास किया।
  • राज्यसभा में विपक्ष ने तीखा विरोध किया, कई सदस्य मंच पर गुस्सा दिखा रहे थे।
  • नए नियम के तहत जजों की संख्या 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।

बिल का विवरण

मौसमी सत्र के 11वें दिन, सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को लोकसभा द्वारा मंजूरी मिल गई। इस विधेयक के अनुसार, अदालत में जजों की कुल संख्या वर्तमान 34 से बढ़ाकर 38 कर दी जाएगी, जिससे न्यायिक कार्यभार के प्रबंधन में सुधार की उम्मीद है।

राज्यसभा में प्रतिक्रिया

राज्यसभा में बिल पर चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने तीखा विरोध किया। कई सांसदों ने माइक्रोफोन पर चिल्लाते हुए बिल को "लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उल्लंघन" कहा और इसे "सत्ता पक्ष का खेल" कहकर आलोचना की। हंगामे के बीच कई बार सत्र को अस्थायी रूप से स्थगित भी किया गया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या को पहले 1950 में 22 से 31 तक बढ़ाया गया था, फिर 1995 में 34 किया गया। इस बार का प्रस्ताव 2026 में अपेक्षित केस लोड को ध्यान में रखकर किया गया है, जिससे कोर्ट के निर्णयों की गति और गुणवत्ता दोनों में सुधार की आशा है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that increasing the bench size can reduce case backlog by up to 15% within two years, strengthening public confidence in the judiciary and aligning India’s legal framework with global standards.

"अधिक जजों की नियुक्ति न केवल कार्यभार घटाएगी, बल्कि न्यायिक स्वतंत्रता को भी सुदृढ़ करेगी," कहा वरिष्ठ न्यायविद डॉ. अंजलि सिंह ने।
Did You Know?: 1995 में जजों की संख्या 34 करने के बाद से, भारत में कोर्ट के केस लोड में निरंतर वृद्धि हुई है, जिससे कई मामलों में वर्षों की देरी होती रही है।

Frequently Asked Questions

Q1: नई संख्या के बाद सुप्रीम कोर्ट में कितने जज होंगे?
A: कुल 38 जज, जिसमें मुख्य न्यायाधीश सहित 37 अन्य जज शामिल हैं।

Q2: क्या यह बिल राज्यसभा की मंजूरी के बिना लागू होगा?
A: नहीं, विधेयक को दोनों सदनों की मंजूरी और राष्ट्रपति की स्वीकृति आवश्यक है, इससे पहले यह लागू नहीं होगा।