श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुुरा कुमारा दिस्सनायके ने कार्यकारी राष्ट्रपति पद को समाप्त करने के लिए व्यापक राष्ट्रीय सहमति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया, जिससे संवैधानिक सुधार की दिशा तय होगी।
मुख्य बिंदु
- राष्ट्रपति दिस्सनायके ने कार्यकारी राष्ट्रपति पद को समाप्त करने के लिए राष्ट्रीय सहमति की माँग की।
- संविधान में व्यापक सुधार के लिए व्यापक संवाद को प्राथमिकता दी गई है।
- तामिल और मुस्लिम गठबंधन के नेताओं के साथ बैठक में कई क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा हुई।
श्रीलंका के राष्ट्रपति अनुुरा कुमारा दिस्सनायके ने सोमवार को कहा कि उनका सरकार कार्यकारी राष्ट्रपति पद को समाप्त करने के लिए संवैधानिक सुधार की दिशा में काम कर रही है, लेकिन इसे जल्दबाजी में संशोधन नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया राष्ट्रीय सहमति और समावेशी संवाद के माध्यम से ही आगे बढ़ेगी।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1978 में लागू किए गए संविधान ने कार्यकारी राष्ट्रपति पद को स्थापित किया, जिससे राष्ट्रपति को अत्यधिक अधिकार प्राप्त हुए। पिछले दशकों में कई बार इस प्रणाली की आलोचना हुई, विशेषकर आर्थिक संकट और सत्ता के एकत्रीकरण के कारण। 2022 के आर्थिक आपदा के बाद सत्ता संरचना पर पुनर्विचार की मांग बढ़ी, जिससे वर्तमान सरकार ने संवैधानिक सुधार की घोषणा की।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that a shift from an executive presidency to a stronger parliamentary system could rebalance power among the legislature, executive, and judiciary, potentially stabilizing Sri Lanka’s volatile political landscape.
"संसदीय प्रभुत्व को सुदृढ़ करना ही श्रीलंका के लोकतांत्रिक विकास की कुंजी है," कहा राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रवींद्र सिंह ने।
Did You Know?
Why This Matters
संविधान में इस परिवर्तन से न केवल सत्ता का संतुलन सुधरेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा भी बढ़ेगा, जिससे आर्थिक पुनरुत्थान की संभावनाएँ बढ़ेंगी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: कार्यकारी राष्ट्रपति पद को समाप्त करने की प्रक्रिया कितनी लंबी होगी?
उत्तर: यह प्रक्रिया राष्ट्रीय संवाद और बहुपक्षीय सहमति पर निर्भर करेगी, जिससे कई महीनों से लेकर कुछ वर्षों तक लग सकते हैं।
प्रश्न 2: यह बदलाव संसद की भूमिका को कैसे बदल देगा?
उत्तर: संसद को अधिक शक्तिशाली बनाया जाएगा, जिससे विधायी प्रक्रिया में राष्ट्रपति की सीमित भूमिका होगी।