तमिलनाडु के डेल्टा और दक्षिणी जिलों में सूखे और एल नीनो के कारण फसल नुकसान से जूझते किसान अब त्वरित वित्तीय मुआवजा और जलस्रोत सुधार की मांग कर रहे हैं। राज्य सरकार के प्रथम कृषि बजट में इन मांगों को शामिल करने का दबाव बढ़ रहा है।
मुख्य बिंदु
- जलभंडार सुधार की तत्काल आवश्यकता
- कृषि बाजार बुनियादी ढांचा उन्नति
- फसल नुकसान का त्वरित वित्तीय मुआवजा
तमिलनाडु के मुख्य मंत्री सी. जोसेफ विजय की टि.वी.के सरकार 6 अगस्त को अपना पहला कृषि बजट पेश करने की तैयारी में है। डेल्टा और दक्षिणी जिलों के किसान एवं व्यापारियों ने इस बजट को जल संसाधन और बाजार संरचना में गहन सुधारों के लिए एक अवसर माना है।
अभी हाल ही में सरकार ने कृषि ऋण माफी की घोषणा की, लेकिन किसान चाहते हैं कि यह माफी फरवरी 2026 तक जारी सभी सहकारी फसल ऋणों को शामिल करे, चाहे किसान छोटा हो या सीमांत। साथ ही, वे प्रोसेसिंग, ड्राईंग और ग्रेडिंग सुविधाओं के बिना फसल के द्वार पर बेचने की प्रथा को रोकने की मांग कर रहे हैं।
एस. रेथिनावेलु, एग्री एंड ऑल ट्रेड चेम्बर के संस्थापक ने माइक्रो जलाशयों की सुरक्षा और कृषि बाजार के आधुनिकीकरण के प्रस्ताव रखे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 60% जल टैंक आधे से कम क्षमता पर हैं, मुख्यतः अतिक्रमण और जल चैनलों के अवरोध के कारण।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दो दशकों में तमिलनाडु ने कई कृषि बजट देखे हैं, परन्तु जल अभाव और बाजार असमानताओं की समस्याएँ लगातार बनी रही हैं। 2015 के कृषि बजट ने जलसंरक्षण पर विशेष ध्यान दिया, परन्तु कार्यान्वयन में कमियां रही। इस कारण से आज किसान पुनः जल और बाजार सुधार की मांग कर रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that addressing these farmer demands could boost Tamil Nadu’s agricultural GDP by up to 3 % and reduce rural distress, setting a precedent for other Indian states facing climate‑induced challenges.
"सही जल प्रबंधन और आधुनिक बाजार बुनियादी ढांचा बिना किसी राज्य की कृषि स्थिरता असंभव है," कृषि अर्थशास्त्री डॉ. मीना राव ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या सरकार कृषि ऋण माफी को सभी किसानों पर लागू करेगी?
उत्तर: किसान चाहते हैं कि माफी सभी सहकारी फसल ऋणों पर व्यापक रूप से लागू हो, लेकिन अंतिम निर्णय बजट घोषणा पर निर्भर करेगा।
प्रश्न 2: बाजार शुल्क को हटाने से किसानों को क्या लाभ होगा?
उत्तर: शुल्क हटाने से दोहरी कराधान समाप्त होगा और किसानों को अधिक आय प्राप्त होगी, जिससे कृषि में निवेश बढ़ेगा।