विजाग महानगरपालिका 35 प्रमुख चौराहों को हॉल्ट‑फ़्री कॉरिडोर में बदलने की योजना बना रही है, जिससे ट्रैफ़िक जाम समाप्त होगा। जापान और पूर्वी एशिया के सफल मॉडल को अपनाकर, अक्टूबर 2026 तक यह परियोजना पूरी करने का लक्ष्य है।

मुख्य बिंदु

  • 35 प्रमुख चौराहों को हॉल्ट‑फ़्री कॉरिडोर में बदलना
  • जापान‑आधारित उन्नत ट्रैफ़िक मॉडल अपनाना
  • अक्टूबर 2026 तक पूरा, अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन से पहले

विजाग के महानगर निगम (GVMC), शहर पुलिस और VMRDA ने मिलकर 35 प्रमुख ट्रैफ़िक जंक्शन को “हॉल्ट‑फ़्री जंक्शन” में रूपांतरित करने का बड़ा कदम उठाया है। इस योजना में फ्लाईओवर, अंडरपास और विशेष बाईं‑टर्न लेन जैसी ग्रेड‑सेपरेटेड सुविधाएँ शामिल होंगी, जिससे पारंपरिक रेड‑लाइट स्टॉप समाप्त हो जाएगा।

परियोजना का डिज़ाइन जापान और अन्य पूर्वी एशियाई देशों में सफलतापूर्वक लागू किए गए शहरी परिवहन मॉडलों से प्रेरित है। इन मॉडलों ने उच्च ट्रैफ़िक घनत्व वाले शहरों में यात्रा समय को 30‑40 % तक घटा दिया है, और विजाग में समान प्रभाव की उम्मीद है।

GVMC ने पहले तीन उच्च‑घनत्व वाले स्थानों – एन्डादा, सत्याम और वंतिलु जंक्शन – पर पायलट मॉडल लागू किया है। प्रारंभिक सर्वेक्षण रिपोर्ट अगले चार दिनों में प्रस्तुत की जाएगी, जिसके बाद शेष 32 जंक्शन पर कार्य शुरू होगा। प्रत्येक जंक्शन की पुनःडिज़ाइन लागत ₹1.5 करोड़ से ₹2 करोड़ के बीच अनुमानित है।

BozokMedia विश्लेषण दिखाता है… यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि हॉल्ट‑फ़्री कॉरिडोर न केवल यात्रा समय घटाते हैं, बल्कि वायु प्रदूषण में भी 15‑20 % की कमी लाते हैं। इस बदलाव से विजाग को अंतर्राष्ट्रीय शिखर सम्मेलन के दौरान एक मॉडल सिटी के रूप में पेश करने का अवसर मिलेगा, जिससे निवेश और पर्यटन दोनों को बढ़ावा मिलेगा।

“हॉल्ट‑फ़्री जंक्शन शहर के ट्रैफ़िक प्रबंधन में क्रांति लाएंगे, जैसा कि टोक्यो ने किया था।” – डॉ. आर. कुमार, शहरी परिवहन विशेषज्ञ
क्या आप जानते हैं?: टोक्यो में 2018 में लागू किए गए समान हॉल्ट‑फ़्री सिस्टम ने दैनिक ट्रैफ़िक जाम को 45 % तक घटा दिया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: क्या हॉल्ट‑फ़्री जंक्शन में ट्रैफ़िक सिग्नल पूरी तरह हटा दिए जाएंगे?
उत्तर: हाँ, ग्रेड‑सेपरेटेड इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण पारंपरिक सिग्नल की आवश्यकता नहीं रहेगी।

प्रश्न 2: पायलट प्रोजेक्ट कब पूरा होगा?
उत्तर: पायलट स्थल पर तकनीकी सर्वेक्षण के बाद अगले दो‑तीन हफ़्तों में निर्माण कार्य शुरू होगा और छह महीने में पूरा माना जाएगा।