भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस के नेता राहुल गांधी पर झारखंड और कर्नाटक के छात्र आंदोलन को अनदेखा करने का आरोप लगाया। उन्होंने संसद में बिलों की चर्चा न होने की भी निंदा की।
मुख्य बिंदु
- संबित पात्रा ने राहुल गांधी पर चयनात्मक उदासी का आरोप लगाया
- झारखंड व कर्नाटक के छात्र विरोधों को कांग्रेस की चुप्पी की आलोचना
- संसदीय बहस में प्रमुख बिलों पर चर्चा नहीं होने की शिकायत
नई दिल्ली – भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं लोकसभा सांसद संबित पात्रा ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस और राहुल गांधी छात्र मुद्दों पर “चयनात्मक उदासी” दिखा रहे हैं। उन्होंने झारखंड में चल रहे छात्र प्रदर्शन और कर्नाटक में पुलिस भर्ती परीक्षा के लीक को लेकर कांग्रेस की चुप्पी को उजागर किया।
पात्रा ने बताया कि झारखंड में हजारों छात्र रोज़ सोशल मीडिया के ज़रिए विरोध जारी रख रहे हैं, जबकि कांग्रेस के नेता इस पर कोई शब्द नहीं निकालते। इसी तरह कर्नाटक में पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा के पेपर लीक के बाद भी कांग्रेस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं देखी गई।
भाजपा के अनुसार, संसद में लगातार बाधाएँ डालने के कारण कई प्रमुख विधेयकों पर चर्चा नहीं हो पाई, जैसे कि सुप्रीम कोर्ट जजेज़ एमेंडमेंट बिल 2026 और बैंकर्स बुक्स एविडेंस बिल। उन्होंने कहा, “जब जनता के हित में बिल पास हो रहे हैं, तो चर्चा न होना लोकतंत्र की धड़कन को रोकता है।”
Historical Background
भारत में छात्र आंदोलन का इतिहास लंबा है, जिसमें 1970 का जन आंदोलन, 1990 के निजीकरण विरोध, और 2020‑21 में विश्वविद्यालय में शुल्क वृद्धि के खिलाफ बड़े प्रदर्शन शामिल हैं। झारखंड और कर्नाटक में हालिया विरोध भी इस परम्परा का हिस्सा हैं, जहाँ छात्रों ने शिक्षा नीति और रोजगार के मुद्दों को उजागर किया है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that selective political outrage can erode public trust in opposition parties, especially when youth movements are at stake. The disparity in response may influence upcoming electoral dynamics in the states involved.
“यदि विरोध के मुद्दों को अनदेखा किया गया तो यह युवा वर्ग के असंतोष को और गहरा कर सकता है,” कहा राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अंशु मेहता।
Frequently Asked Questions
क्या राहुल गांधी ने कर्नाटक में छात्र मुद्दों पर कोई बयान दिया?
अब तक राहुल गांधी ने कर्नाटक के छात्र आंदोलन पर सार्वजनिक बयान नहीं दिया है।
भाजपा का छात्रों के मुद्दों पर रुख क्या है?
भाजपा ने लगातार छात्र अधिकारों और शैक्षणिक सुधारों की मांग को समर्थन दिया है, जबकि विपक्षी दलों को चयनात्मक प्रतिक्रिया का आरोप लगाता रहा है।