भारतीय रिज़र्व बैंक ने तीन‑दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक के बाद रेपो दर 5.25% पर बरकरार रखी। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत अभी भी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि महंगाई अस्थायी रूप से बढ़ेगी।

मुख्य बिंदु

  • RBI ने रेपो दर 5.25% पर स्थिर रखी
  • भारत विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहा है
  • अगले तिमाही में महंगाई में गिरावट की उम्मीद

रेपो दर पर निर्णय

रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने अपने तीन‑दिवसीय मौद्रिक नीति बैठक के बाद रेपो दर को 5.25% पर अपरिवर्तित रखा। यह निर्णय बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप आया, जिसमें निवेशकों ने मौद्रिक नीति में स्थिरता की आशा जताई थी।

गवर्नर का बयान

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अपने संबोधन में कहा, “भारत अभी भी विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है।” उन्होंने जोड़ी कि “हेडलाइन महंगाई निकट भविष्य में तेल व खाद्य कीमतों के कारण बढ़ेगी, लेकिन यह तिहाई तिमाही में शिखर पर पहुँचेगी और फिर घटने लगेगी।”

महंगाई और वैश्विक माहौल

मल्होत्रा ने बताया कि महंगाई का बढ़ना मुख्यतः खाद्य व ईंधन कीमतों से प्रेरित है, न कि व्यापक स्तर पर। उन्होंने कहा, “पश्चिम एशिया के संघर्ष ने वैश्विक व्यापार मार्गों को बाधित किया है, जिससे बाजार में अस्थिरता बढ़ी है और व्यापारिक भावना दब गई है।”

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

पिछले पाँच वर्षों में RBI ने रेपो दर को कई बार समायोजित किया है, सबसे हालिया परिवर्तन 2024 में 4.75% से 5.00% तक था। इस दर को 5.25% पर स्थिर रखने से संकेत मिलता है कि नीति निर्माताओं को अर्थव्यवस्था की गति और महंगाई के बीच संतुलन स्थापित करने की आवश्यकता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that a steady repo rate at 5.25% reinforces investor confidence and supports India's growth narrative, especially as global supply chains face disruptions from geopolitical tensions.

“स्थिर दर का मतलब है कि नीति निर्माताओं को आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहित करने के साथ महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में स्पष्ट रणनीति है,” कहा वित्तीय विशेषज्ञ प्रो. रजत सिंह।
क्या आप जानते हैं?: भारत ने 2015 के बाद से लगातार दो दशकों में सबसे तेज़ GDP वृद्धि दर्ज की है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: RBI ने रेपो दर को स्थिर रखने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: नीति निर्माता चाहते हैं कि आर्थिक वृद्धि को प्रोत्साहन मिले जबकि महंगाई की अस्थायी बढ़ोतरी को नियंत्रित किया जा सके।

प्रश्न 2: इस निर्णय का भारतीय अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
उत्तर: स्थिर दर से ऋण लागत में बड़ी परिवर्तन नहीं होगी, जिससे निवेश और उपभोक्ता खर्च में निरंतरता बनी रहेगी।