कांग्रेस के प्रवक्ता जयराम रामेश ने ट्विटर पर कहा कि यू.पी.आई. लेन‑देन पर शुल्क लगाने की नई बिल्डिंग अमेरिकी दबाव से प्रेरित है। इस कदम से आम जनता को अतिरिक्त लागत उठानी पड़ेगी, जबकि रिज़र्व बैंक के पास पर्याप्त निधि उपलब्ध है।
मुख्य बिंदु
- कांग्रेस का आरोप कि अमेरिकी सरकार प्रभाव डाल रही है।
- यू.पी.आई. शुल्क प्रस्ताव का आर्थिक प्रभाव आम जनता पर पड़ेगा।
- रिज़र्व बैंक के पास 2.86 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त निधि मौजूद है।
पंजाब में 6 अगस्त को कांग्रेस के जनसंचालन प्रमुख जयराम रामेश ने एक एक्स‑पोस्ट में कहा कि यू.पी.आई. के लेन‑देन पर अब तक कोई शुल्क नहीं था, लेकिन नई विधेयक से यह बदल जाएगा। उन्होंने कहा कि यह परिवर्तन अमेरिकी वित्तीय संस्थानों के दबाव से आया है, जो भारतीय डिजिटल भुगतान बाजार को अपने वीज़ा व मास्टरकार्ड जैसी सेवाओं से बाहर निकालना चाहते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
युपीआई (यूनिफ़ाइड पेमेंट्स इंटरफ़ेस) 2016 में भारत सरकार द्वारा लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य बैंक‑से‑बैंक रियल‑टाइम भुगतान को मुफ्त में उपलब्ध कराना था। तब से यह देश में सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला डिजिटल भुगतान माध्यम बन गया, जिससे 2023 में लगभग 2 ट्रिलियन रुपये का दैनिक लेन‑देन हुआ। पहले इस प्रणाली पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाता था, जिससे सभी वर्गों के उपयोगकर्ताओं को लाभ मिला।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that imposing a fee on UPI transactions could erode the competitive advantage India enjoys in the global fintech arena, potentially driving users toward foreign payment gateways and increasing transaction costs for businesses.
डॉ. अजय सिंह, वित्तीय विशेषज्ञ कहते हैं: "यदि शुल्क लागू होते हैं तो डिजिटल भुगतान में गिरावट होगी और छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त बोझ उठाना पड़ेगा।"
Frequently Asked Questions
- क्या यू.पी.आई. शुल्क तुरंत लागू होगा? वर्तमान में यह विधेयक अभी संसद में चर्चा का विषय है, इसलिए तुरंत लागू नहीं होगा।
- क्या यह कदम भारतीय डिजिटल भुगतान को प्रभावित करेगा? विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क लागू होने से उपयोगकर्ता अन्य मुफ्त विकल्पों की ओर रुख करेंगे, जिससे कुल भुगतान इकोसिस्टम में बदलाव आ सकता है।