एक नवीन सर्वे के अनुसार, 81% भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई करने के बाद भारत लौटने की योजना बनाते हैं। यह रुझान दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय डिग्री को स्थायी प्रवास के बजाय वैश्विक एक्सपोज़र माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु
- 81% छात्रों का भारत लौटने का इरादा
- परिवार का प्रभाव घटा, आत्मनिर्भरता बढ़ी
- पोस्टग्रेजुएट कोर्स सबसे लोकप्रिय
सर्वे के मुख्य निष्कर्ष
ऑक्सफ़ोर्ड इंटरनेशनल द्वारा आयोजित Student Global Mobility Index के तीसरे संस्करण ने 17,925 उत्तरदाताओं से डेटा एकत्र किया। परिणाम दर्शाते हैं कि अधिकांश भारतीय छात्र अपने विदेश में पढ़ाई को एक अस्थायी चरण मानते हैं, न कि स्थायी प्रवास के रूप में।
81% छात्र स्पष्ट रूप से अपने कोर्स समाप्त होने के बाद भारत लौटने की योजना बनाते हैं, जबकि 15% ने "नौकरी के लिए आवेदन" को अगला कदम बताया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वह नौकरी भारत में होगी या विदेश में।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia analysis shows कि इस परिवर्तन का असर भारतीय शिक्षा नीति, विदेश में नौकरी के अवसर और घरेलू स्किल्स की मांग पर पड़ेगा। यदि छात्रों की प्रवृत्ति घर लौटने की है, तो भारत को अधिक गुणवत्ता वाले रोजगार और नवाचार के लिए तैयार होना पड़ेगा।
"विदेशी शिक्षा को अब एक ‘ग्लोबल एक्सपोज़र’ के रूप में देखा जा रहा है, न कि स्थायी प्रवास का साधन," Dr. अनीता शर्मा, शिक्षा विशेषज्ञ ने कहा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दशक में भारतीय छात्रों की विदेश में पढ़ाई की इच्छा में निरंतर वृद्धि हुई है, लेकिन 1990 के दशक के बाद से ही भारत लौटने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है। यह बदलाव आर्थिक विकास, घरेलू रोजगार के अवसर और परिवारिक समर्थन संरचनाओं में बदलाव को दर्शाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: कौन से कोर्स भारतीय छात्रों में सबसे अधिक लोकप्रिय हैं?
उत्तर: पोस्टग्रेजुएट कोर्स, विशेषकर बिज़नेस और मैनेजमेंट, 75% उत्तरदाताओं द्वारा चुने गए।
प्रश्न 2: छात्रों को विदेश में पढ़ाई के लिए जानकारी कहाँ से मिलती है?
उत्तर: 56% छात्रों ने गूगल को सबसे भरोसेमंद स्रोत बताया, जबकि 35% एजेंटों पर भरोसा करते हैं।