एक मध्य आयु वर्ग के व्यक्ति द्वारा इंस्टाग्राम पर 10,000 रुपये की फ्रीलांस जॉब धोखा दिल्ली पुलिस को एक बड़े बैंक खाता किट फैक्ट्री तक ले गया। इस साजिश में छह आरोपियों सहित एक बैंक मैनेजर को गिरफ्तार किया गया, जिन्होंने साइबर धोखाधड़ी के लिए तैयार खाते बेचे।

मुख्य बिंदु

  • इंस्टाग्राम पर 10,000 रुपये की धोखाधड़ी ने एक बड़े नेटवर्क को उजागर किया
  • छह आरोपियों, जिसमें एक बैंक मैनेजर भी शामिल है, को गिरफ्तार किया गया
  • सिंडिकेट ने ‘बैंक खाता किट फैक्ट्री’ के रूप में तैयार खाते बेचे

जाल की शुरुआत

दिल्ली के बालजीत नगर में एक स्टिचिंग मशीन मरम्मत करने वाले मध्यम आयु वर्ग के व्यक्ति ने इंस्टाग्राम पर एक ‘फ्रीलांस जॉब’ का विज्ञापन देखा। लिंक पर क्लिक करने के बाद वह व्हाट्सएप चैट में पहुँचा, जहाँ उसे 10,000 रुपये की पंजीकरण फीस देनी पड़ी। तीन किस्तों में भुगतान करने के बाद, चैट बंद हो गई और पेशकश का कोई जवाब नहीं मिला।

जाँच और गिरफ़्तारी

पीड़ित ने राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर शिकायत दर्ज की, जिससे केस दिल्ली के साइबर पुलिस स्टेशन को सौंपा गया। इंस्पेक्टर योगराज दलाल की टीम ने पता लगाया कि भुगतान किए गए पैसे विभिन्न बैंकों के खातों में जमा हुए थे, जिनमें एक शैलो कंपनी ‘डैमियन ट्रेडर्स’ के नाम पर खाता था। आगे की जांच ने मोहित सोनी, योगेश कुमार और रंजित डैमियन एक्का जैसे कई लोगों को उजागर किया।

‘बैंक खाता किट फैक्ट्री’ का मॉडल

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (सेंट्रल) रोहित राजबीर सिंह ने इस संचालन को “पूर्ण बैंक खाता किट फैक्ट्री” कहा। वे वित्तीय रूप से कमजोर लोगों को ‘म्यूल अकाउंट होल्डर’ बनाकर उनके दस्तावेज़ों से शैलो कंपनियां स्थापित की जाती थीं, और फिर अंदरूनी लोगों की मदद से तेज़ी से बैंक खाते खोल दिए जाते थे। ये खाते भारत और विदेश में स्थित साइबर धोखेबाजों को बेचे जाते थे।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में बैंक खाता खोलने की प्रक्रिया में KYC (Know Your Customer) नियमों का कड़ाई से पालन किया जाता है। फिर भी पिछले कुछ वर्षों में कई ‘म्यूल अकाउंट’ स्कैम सामने आए हैं, जहाँ अंदरूनी लोगों की मदद से झूठे दस्तावेज़ों के माध्यम से खाते खोले जाते हैं। यह मामला इस प्रकार की व्यवस्थित धोखाधड़ी का एक नया उदाहरण है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय धन प्रवाह को भी शामिल किया गया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the exposure of such a sophisticated “account kit” network highlights systemic vulnerabilities in bank compliance and underscores the urgent need for stricter KYC enforcement across Indian financial institutions.

“बैंक के अंदरूनी सहयोगियों की भागीदारी बिना कड़ी निगरानी के बड़े साइबर अपराध को जन्म देती है,” कहा साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. रवीश कुमार ने।
Did You Know?: भारत में 2020‑2024 के बीच बैंक म्यूल अकाउंट स्कैम में कुल नुकसान 150 करोड़ रुपये से अधिक हुआ है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या सामान्य नागरिक भी इस प्रकार के ‘म्यूल अकाउंट’ बनवाकर जुर्माना भुगत सकते हैं?

उत्तर: हाँ, यदि कोई व्यक्ति अपने पहचान दस्तावेज़ों का दुरुपयोग करके बैंक खाते खोलता है तो वह कानूनी कार्रवाई का सामना कर सकता है।

प्रश्न 2: इस स्कैम से बचने के लिए नागरिकों को क्या सावधानी बरतनी चाहिए?

उत्तर: अनजाने लिंक पर क्लिक न करें, पंजीकरण शुल्क जैसी अग्रिम मांगों से सतर्क रहें और किसी भी संदेहास्पद लेन‑देन को तुरंत पुलिस को रिपोर्ट करें।