अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 14 पैसे कमजोर होकर 95.22 पर बंद हुआ। डॉलर इंडेक्स की हल्की मजबूती, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और विदेशी फंड की निकासी ने इस गिरावट को तेज किया, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने कुछ राहत दी।
मुख्य बिंदु
- रुपया 14 पैसे गिरकर 95.22 पर बंद
- डॉलर इंडेक्स में हल्की मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि
- विदेशी फंड की निकासी ने दबाव बढ़ाया, तेल की कीमतों ने राहत दी
नई दिल्ली – 7 अगस्त 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 14 पैसे गिरकर 95.22 पर समाप्त हुआ। ट्रेडिंग सत्र में रुपये 95.12 से 95.24 के बीच उतरा-चढ़ा, जबकि खुलते समय 95.13 पर था। यह गिरावट नौ लगातार दिनों में पहली बार देखी गई जब डॉलर इंडेक्स में मामूली मजबूती दर्ज हुई।
फॉरेक्स ट्रेडर्स ने बताया कि विदेशी फंडों की निरंतर निकासी ने रुपये की कमजोरी को और तेज कर दिया। साथ ही, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मामूली वृद्धि ने डॉलर को सपोर्ट किया, जिससे भारतीय मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने रुपये को कुछ राहत दी। ब्रेंट क्रूड की कीमत 79.52 डॉलर प्रति बैरल पर रही, जो भारत के आयात बिल को दबाव में रखती है, परंतु इस स्तर पर रहने से महंगाई पर भी कुछ असर कम हुआ।
अनुज चौधरी, मिराए एसेट शेयरख़ान के रिसर्च एनालिस्ट, ने कहा कि वैश्विक बाजार में रिस्क एपेटाइट बढ़ने के कारण आगे के दिनों में रुपये में हल्का पॉज़िटिव बायस बना रह सकता है, बशर्ते डॉलर इंडेक्स या ट्रेजरी यील्ड में तेज़ उछाल न हो।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि रुपये की इस गिरावट का सीधा असर भारतीय आयातकों, विशेषकर तेल आयातकों, तथा महंगाई दर पर पड़ता है। यदि डॉलर की मजबूती जारी रही तो भारतीय निर्यातकों को भी प्रतिस्पर्धात्मक दबाव का सामना करना पड़ेगा।
"विदेशी फंड की निकासी और अमेरिकी ब्याज दरों में वृद्धि मिलकर भारतीय मुद्रा पर दोहरी दबाव बनाते हैं," कहा वित्त विशेषज्ञ रजत सिंह ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या विदेशी फंड की निकासी लगातार जारी रहेगी?
उत्तर: विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक जोखिम भावना के बदलने पर यह प्रवृत्ति बदल सकती है।
प्रश्न 2: तेल की कीमतों में गिरावट से रुपये को कितनी राहत मिल सकती है?
उत्तर: कम तेल कीमतें आयात बिल को घटाते हैं, जिससे मौद्रिक नीति में कुछ लचीलापन आ सकता है।