विज़ाकपट्टनम के बीच रोड पर मर्चेंट नेवी ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने 40 समुद्री कर्मियों के साथ युद्ध क्षेत्रों में हत्याओं के खिलाफ मौन प्रदर्शन किया। यह कदम फरवरी 2026 से बढ़ती भारतीय समुद्री कर्मियों की हताहतों के प्रकाश में उठाया गया है।
Key Takeaways
- 40 मर्चेंट नेवी कर्मियों ने शांतिपूर्ण मार्च किया
- हत्याओं के विरुद्ध न्याय और मुआवजे की मांग
- उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में जोखिम मूल्यांकन की आवश्यकता
प्रदर्शन का विवरण
विज़ाकपट्टनम के काली माता मंदिर से YMCA तक लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर समुद्री कर्मियों ने मौन मार्च किया। मर्चेंट नेवी ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन (MNOWA) के अध्यक्ष काली प्रसाद ने कहा कि इन कर्मियों को नागरिक माना जाता है, न कि सैन्य, और उन्हें युद्ध के शिकार नहीं बनना चाहिए।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
फ़रवरी 28, 2026 को ईरान‑इज़राइल‑अमेरिका के बीच संघर्ष शुरू होने के बाद से भारतीय समुद्री कर्मियों पर लगातार ड्रोन, मिसाइल और प्रोजेक्टाइल हमले हुए हैं। स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़, ओमान की खाड़ी और रेड सी में कई जहाज़ों को नुकसान पहुँचा है।
कर्मियों की हताहतें
मार्च 1 को ओमान के मस्कट के पास टैंकर MKD वायोम पर हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय क्रू सदस्य मारा गया। जून 10 को यू.एस. के द्वारा MT सेट्टेबेल्लो पर हमला किया गया, जिसमें विज़ाकपट्टनम के मुख्य इंजीनियर पटनाला सुरेश सहित तीन भारतीय मरीन मारे गए। जुलाई 14 को ईरानी मिसाइलों ने टैंकर अल बहीह और मोम्बासा को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम एक भारतीय मर गया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the growing casualty count not only threatens the livelihood of thousands of Indian families but also raises questions about the adequacy of international maritime safety protocols in active war zones.
"यदि समुद्री कर्मियों को युद्ध के शिकार बनना पड़े तो यह वैश्विक व्यापार के लिए एक गंभीर चेतावनी है," कहते हैं अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अजय सिंह।
Frequently Asked Questions
Q1: क्या भारतीय सरकार ने इन हत्याओं पर कोई प्रतिक्रिया दी है?
A: सरकार ने कहा है कि वह सभी प्रभावित परिवारों को आवश्यक सहायता प्रदान करेगी और अंतरराष्ट्रीय मंच पर इस मुद्दे को उठाएगी।
Q2: समुद्री कर्मियों को सुरक्षित रखने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
A: MNOWA ने जहाज़ मालिकों से जोखिम मूल्यांकन और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में संचालन को सीमित करने की मांग की है।