असम प्रदेश कांग्रेस समिति ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर राज्य की लगातार बाढ़ और नदी क्षरण को राष्ट्रीय समस्या घोषित करने का आग्रह किया। कांग्रेस के अनुसार असम के 40% क्षेत्र, यानी 31.05 लाख हेक्टेयर, बाढ़-प्रवण है, जो राष्ट्रीय औसत 10.2% से कई गुना अधिक है।
मुख्य बिंदु
- असम के 40% भूमि बाढ़-प्रवण
- कांग्रेस ने इसे राष्ट्रीय समस्या घोषित करने की मांग की
- उच्च स्तरीय टास्क‑फ़ोर्स की स्थापना का प्रस्ताव
परिस्थिति का विवरण
असम प्रदेश कांग्रेस समिति (APCC) ने 13 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक यादृच्छिक पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें असम की बार‑बार होने वाली बाढ़ और नदी क्षरण को ‘राष्ट्रीय समस्या’ घोषित करने का आग्रह किया गया। इस दस्तावेज़ को प्रदेश के राहत एवं पुनर्वास विभाग के अध्यक्ष प्रांजित दास ने राज्य के गवर्नर लक्ष्मण प्रसाद आचार्य को सौंपा।
पत्र में बताया गया कि असम के कुल भूमि क्षेत्रफल का लगभग 40% या 31.05 लाख हेक्टेयर बाढ़‑प्रवण है, जबकि राष्ट्रीय औसत केवल 10.2% है। ब्रह्मपुत्र और बाराक नदियों में भारी सिल्ट जमा, तीव्र मानसून वर्षा, उथले नदी तल, बाँध की दरारें और जलवायु परिवर्तन इन बाढ़ों को बढ़ाते हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
असम में बाढ़ की समस्या दशकों से चलती आ रही है; 1998, 2008, 2012 और 2022 जैसी प्रमुख बाढ़ों ने लाखों लोगों को विस्थापित किया है। प्रत्येक बड़ी बाढ़ ने कृषि, चाय बागानों और दैनिक मजदूरों की आजीविका को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, जिससे राज्य की आर्थिक प्रगति बाधित हुई है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that without central intervention, Assam’s flood crisis will exacerbate migration pressures, strain national disaster‑relief budgets, and undermine India’s climate‑resilience commitments.
"बाढ़‑प्रबंधन में वैज्ञानिक ड्रीजिंग और रीयल‑टाइम पूर्वानुमान के बिना कोई स्थायी समाधान संभव नहीं है," कहा जलवायु विशेषज्ञ डॉ. अनीता शर्मा ने।
Frequently Asked Questions
- कांग्रेस का प्रस्ताव क्या है? कांग्रेस ने एक उच्च‑स्तरीय टास्क‑फ़ोर्स की स्थापना और एक व्यापक मास्टर‑प्लान के लिए केंद्र से फंड की मांग की है।
- क्या राज्य सरकार इस मांग का समर्थन करती है? राज्य सरकार ने भी बाढ़‑प्रबंधन में केंद्र के सहयोग की आवश्यकता को स्वीकार किया है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक कदम नहीं उठाए गए हैं।