तीरुनेल्वेली के विशेष पीओसीएसओ कोर्ट ने 50 वर्षीय पुजारी एस. एब्राहम को चार नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मामले में मृत्युदंड सुनाया। उन्होंने 2022 में मोरल साइंस कक्षाओं के बहाने बच्चों का शोषण किया।

  • एस. एब्राहम को 4 नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के लिए मृत्युदंड मिला।
  • अभियुक्त ने मोरल साइंस कक्षाओं के बहाने शोषण किया।
  • पीओसीएसओ विशेष अदालत ने 20 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया।

मामले का विवरण

तीरुनेल्वेली जिले के मेला इलंथैकलम में एक प्रार्थना सभागार चलाने वाले पुजारी एस. एब्राहम (50) ने 2022 में चार नाबालिग लड़कियों को मोरल साइंस कक्षाओं के नाम पर यौन शोषण किया। पीड़ित लड़कियों ने अपने माता-पिता को सूचित किया और थेवरकलम पुलिस ने 5 जुलाई 2022 को एब्राहम को गिरफ्तार किया।

विशेष पीओसीएसओ कोर्ट का निर्णय

पीओसीएसओ (बाल संरक्षण) मामलों के विशेष कोर्ट के न्यायाधीश सुरेश कुमार ने 20 अगस्त 2026 को एब्राहम को मृत्युदंड की सजा सुनाई। यह सजा भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत लागू की गई, जो अत्याचार के मामलों में सर्वोच्च दंड है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में बाल यौन शोषण के मामलों में कठोर सजा देने की प्रवृत्ति पिछले दशक में बढ़ी है। 2012 के बाल यौन शोषण विरोधी कानून (पीओसीएसओ एक्ट) के बाद से, कई उच्च प्रोफ़ाइल मामलों में मृत्युदंड या आजीवन कारावास दिया गया है, जिससे समाज में सुरक्षा की आशा बढ़ी है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that यह फैसला न केवल पीड़ितों को न्याय दिलाता है, बल्कि धार्मिक संस्थानों में विश्वास को भी पुनर्स्थापित करता है, जहाँ अक्सर शोषण के मामलों को अनदेखा किया जाता है।

"ऐसे मामलों में कड़ी सजा सामाजिक चेतना को जागृत करती है और भविष्य में संभावित अपराधियों को रोकती है।" – मानव अधिकार वकील अनीता शर्मा
Did You Know?: भारत में 2018 से पीओसीएसओ मामलों में मृत्युदंड की दर 12% से अधिक रही है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या मृत्युदंड की सजा तुरंत लागू होगी?
A1: नहीं, एब्राहम को अपील का अधिकार है और उच्च न्यायालय में पुनर्विचार हो सकता है।

Q2: पीओसीएसओ एक्ट के तहत कौन-कौन से दंड निर्धारित हैं?
A2: इस एक्ट के तहत 7 से 14 साल की जेल, आजीवन कारावास या मृत्युदंड तक की सजा संभव है, अपराध की गंभीरता के आधार पर।