अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी ने बिना निर्धारित समय के कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार के घर मुलाकात की। यह मुलाकात बेंगलुरु के टनल प्रोजेक्ट में अडानी की बोली को लेकर राजनीतिक चर्चा को भड़का रही है।
- गौतम अडानी ने अनियोजित रूप से कर्नाटक के मुख्यमंत्री से मुलाकात की
- बैठक बेंगलुरु के 17.1 किमी टनल प्रोजेक्ट में अडानी की बोली से जुड़ी है
- विपक्षी नेताओं ने इस मुलाकात को राजनीतिक प्रतिपक्ष के रूप में उजागर किया
बेंगलुरु (24 अगस्त, 2026) – अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी ने रविवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवाकुमार के आवास पर अचानक कदम रखा। सरकारी सूत्रों के अनुसार यह मुलाकात अनियोजित थी; अडानी उस समय शहर के दक्षिण भाग में एक निजी कार्यक्रम में भाग ले रहे थे और हवाई अड्डे की ओर जा रहे थे।
शिवाकुमार ने इसे "शिष्टाचारिक मुलाकात" बताया, क्योंकि वह अभी हाल ही में मुख्यमंत्री बने हैं। लेकिन राजनीतिक पर्यवेक्षकों ने इसे अडानी के 17.1 किमी उत्तर-दक्षिण दोहरी टनल परियोजना में बोली के संदर्भ में देखा। इस परियोजना का अनुमानित मूल्य लगभग ₹17,000 करोड़ है और यह बूट (Build‑Own‑Operate‑Transfer) मॉडल पर आधारित है, जिसमें सरकार 40% वित्तीय सहायता HUDCO के ऋण के माध्यम से देगी।
अडानी समूह ने इस टनल के लिए लगभग ₹22,000 करोड़ की बोली दी है, जिससे वह सबसे कम बोलीदाता बन गया है। हालांकि, कई अन्य कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने भी प्रतिस्पर्धी प्रस्ताव प्रस्तुत किए हैं, जिससे बोली की पारदर्शिता पर सवाल उठे।
| कंपनी | बोली राशि (₹ करोड़) |
|---|---|
| अडानी ग्रुप | 22,000 |
| लार्सेन एंड टुब्रो | 23,500 |
| श्रीराम इन्फ्रास्ट्रक्चर | 24,100 |
विपक्षी नेता आर. अशोक ने इस मुलाकात को कांग्रेस के भीतर राजनीतिक जाँच का विषय बना दिया। उन्होंने कहा, "राहुल गांधी ने अडानी को भाजपा एजेंट कहा, पर कर्नाटक सरकार ने अडानी के लिए लाल कालीन बिछा दी। क्या केंद्र कांग्रेस ने इसे अनुमति दी?" शिवाकुमार ने तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "अडानी ने मेरे मुख्यमंत्री पद ग्रहण करने के बाद शिष्टाचारिक तौर पर मुलाकात की।"
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the timing of the meeting, coinciding with the final stages of the tunnel bid evaluation, could influence the selection process and signal a strategic partnership between the state government and a major private conglomerate.
"अडानी का बिड सबसे कम है, पर राजनीतिक समर्थन से परियोजना की सफलता की संभावनाएँ अधिक हो सकती हैं," कहा राजनीतिक विश्लेषक प्रीति वर्मा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: अडानी की बोली इतनी कम क्यों है?
उत्तर: अडानी ने अपनी वित्तीय ताकत और तेज़ कार्यान्वयन क्षमताओं को दर्शाते हुए लागत‑प्रभावी समाधान प्रस्तावित किया है।
प्रश्न 2: क्या इस मुलाकात से टनल परियोजना की मंजूरी पर असर पड़ेगा?
उत्तर: अभी स्पष्ट नहीं है, पर राजनीतिक समर्थन से प्रक्रिया में गति आ सकती है।