कर्नाटक के किसान काबिनी जलाशय से तमिलनाडु को पानी भेजे जाने के खिलाफ गन हाउस सर्कल से काडा कार्यालय तक मार्च कर रहे हैं। उन्होंने जल जारी करने को रोकने और अपने फसल‑क्षेत्रों को पानी उपलब्ध कराने की तत्काल मांग की। यह विरोध कर्नाटक राज्य में जल‑संसाधन वितरण की बहस को फिर से उभारा है।

  • कर्नाटक के हजारों किसान गन हाउस सर्कल से काडा कार्यालय तक मार्च कर रहे हैं।
  • प्रदर्शन का आयोजन कर्नाटक राज्य किसान संघ (Karnataka Rajya Raitha Sangha) ने किया।
  • काबिनी बांध से तमिलनाडु को पानी भेजने को रोकने की माँग की जा रही है।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

काबिनी बांध, जो कर्नाटक के काबिनी कमांड एरिया में स्थित है, को 1970 के दशक में निर्माण किया गया था। इसके निर्माण में 20,000 एकड़ वनभूमि, कई जनजातीय बस्तियाँ और हजारों एकड़ कृषि भूमि का बलिदान किया गया। आज भी कई प्रभावित परिवारों को उचित पुनर्वास नहीं मिला है, जैसा कि कर्नाटक राज्य किसान संघ के अध्यक्ष बडागालापुरा नागेंद्र ने बताया।

मार्च का प्रारूप

सोमवार को, हरे झंडे लेकर और सरकार के खिलाफ नारों के साथ, किसानों ने गन हाउस सर्कल से काडा कार्यालय तक मार्च किया। उन्होंने बताया कि काबिनी जलाशय का जल स्तर कुछ हफ्ते पहले ही पूर्ण हो गया था, फिर भी जल को तमिलनाडु की ओर भेजा जा रहा है जबकि स्थानीय किसानों की फसलें पानी की कमी से खतरे में हैं।

काबिनी जल का महत्व

काबिनी कमांड एरिया में लगभग 30,000 हेक्टेयर कृषि जमीन है, जहाँ फसल‑सिचाई के लिए जल अत्यंत आवश्यक है। इस क्षेत्र में धान, गन्ना और फल‑फूल की खेती मुख्य आय स्रोत है। जल की कमी से न केवल फसल उत्पादन घटेगा, बल्कि किसानों की आय में भी भारी गिरावट आएगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

काबिनी बांध की योजना मूलतः बेंगलुरु शहर और तमिलनाडु के जल‑संकट को हल करने के लिए बनाई गई थी। लेकिन समय के साथ यह विवाद का विषय बन गया, क्योंकि स्थानीय किसानों को पर्याप्त जल नहीं मिल पाया। पिछले दशकों में कई बार इस मुद्दे पर अदालत‑सत्र में बहस हुई है, परन्तु स्थायी समाधान नहीं निकला।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the protest highlights a growing tension between inter‑state water sharing agreements and grassroots agricultural needs. If unresolved, it could set a precedent for future disputes across river basins in India, affecting food security and regional politics.

"जल‑स्रोतों का न्यायसंगत वितरण न होने से सामाजिक अस्थिरता बढ़ती है," जल‑नीति विशेषज्ञ डॉ. अजय कुमार ने कहा।
Did You Know?: काबिनी बांध का जलाशय 1,540 करोड़ क्यूबिक मीटर क्षमता रखता है, जो भारत के कई बड़े जल‑प्रोजेक्ट्स में से एक है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: काबिनी जल को तमिलनाडु को भेजने का कानूनी आधार क्या है?

उत्तर: दोनों राज्यों के बीच जल‑साझा समझौते के तहत, जब जलाशय का स्तर पूर्ण हो जाता है, तो अतिरिक्त जल को पड़ोसी राज्य को भेजा जाता है।

प्रश्न 2: क्या किसानों ने वैकल्पिक जल‑स्रोतों की माँग की है?

उत्तर: हाँ, उन्होंने निकटवर्ती टैंकों को भरने और स्थानीय जल‑नियोजन को प्राथमिकता देने की मांग की है।