सम्पूर्ण किसान मोर्चा ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) अधिनियम 2026 को ‘वैधिक विरोधी’ कहा, क्योंकि यह राज्य की सहकारी अधिकारों में सेंसरशिप करता है। संगठन का तर्क है कि नया कानून शहरी‑केंद्रित विकास मॉडल को बढ़ावा देता है और संविधान के सातवें अनुसूची का उल्लंघन करता है।

  • राज्य की सहकारी अधिकारों में सेंसरशिप
  • केंद्रीय सरकार का शहरी‑केंद्रित विकास मॉडल को बढ़ावा
  • संविधान के सातवें अनुसूची के उल्लंघन की सम्भावना

सम्पूर्ण किसान मोर्चा (SKM) ने राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) अधिनियम 2026 को “वैधिक विरोधी” घोषित किया, यह तर्क देते हुए कि यह कानून संघीय अधिकारों का उल्लंघन करता है। SKM का कहना है कि यह नया अधिनियम केंद्र को सीधे सहकारी संस्थाओं में हस्तक्षेप करने की शक्ति देता है, जो राज्य की सूची में स्थित “सहयोग” के तहत आता है।

संविधान के सातवें अनुसूची के अनुसार, सहयोग का प्रावधान राज्य के अधिकार में है। SKM ने इस बात पर ज़ोर दिया कि NCDC अधिनियम “नग्न घुसपैठ” है, जहाँ केंद्र सरकार बिना राज्य की सहमति के सहकारी समाजों के शेयरों पर नियंत्रण ले रही है। यह अंतरराष्ट्रीय सहकारी गठबंधन (ICA) के सिद्धांतों—स्वायत्तता, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक नियंत्रण—के विरुद्ध है।

2021 में सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि केंद्र को सहयोगी संस्थाओं में सीमित हस्तक्षेप ही करना चाहिए, क्योंकि ये संस्थाएँ राज्य के अधीन हैं। SKM का मानना है कि इस अधिनियम में किए गए संशोधन द्वारा वह आदेश नष्ट करने की कोशिश की गई है, जिससे न्यायिक संतुलन बिगड़ रहा है।

कृषि और ग्रामीण उद्योगों के विकास के लिए विशेष बजट आवंटन को देखते हुए, अधिनियम का शहरी‑केंद्रित मॉडल पर झुकाव संसाधनों को कृषि‑आधारित क्षेत्रों से हटाकर शहरी क्षेत्रों की ओर मोड़ देगा। इससे ग्रामीण भारत की आर्थिक वृद्धि में बाधा आएगी और किसानों की आय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

SKM ने यह भी कहा कि यह कदम “भाजपा‑आरएसएस गठबंधन द्वारा समर्थित अभिजात वर्ग की अधिनायकवादी प्रवृत्ति” को उजागर करता है, जहाँ केंद्र के हाथ में अधिक शक्ति केंद्रित हो रही है। यह राजनीतिक दबाव के माध्यम से राज्यों की नीति स्वतंत्रता को कम करने की रणनीति का हिस्सा है।

विपक्षी दल और कई कृषि विशेषज्ञों ने इस अधिनियम के संभावित प्रभावों पर चेतावनी जारी की है, यह तर्क देते हुए कि यह ग्रामीण भारत के विकास को ठंडा कर देगा और शहरीकरण को तेज़ी से आगे बढ़ाएगा। कई राज्य सरकारें इस मुद्दे पर बहस करने और संभावित विधायी चुनौतियों का सामना करने की तैयारी कर रही हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the NCDC Act could set a precedent for further central encroachments into state‑listed domains, potentially reshaping India's federal balance and affecting millions of cooperative members nationwide.

“केंद्रीय सरकार द्वारा सहकारी संस्थानों में सीधा हस्तक्षेप भारतीय लोकतंत्र की बुनियादी संरचना को खतरे में डालता है,” कहा कृषि नीति विशेषज्ञ डॉ. अनीता सिंह।
Did You Know?: भारत में 2020 तक 10 लाख से अधिक सहकारी संस्थाएँ पंजीकृत थीं, जो ग्रामीण वित्त का 30% से अधिक हिस्सा संभालती थीं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या NCDC अधिनियम राज्य सरकारों की सहकारी संस्थाओं पर नियंत्रण को पूरी तरह खत्म कर देगा?

उत्तर: यदि अधिनियम के प्रावधान लागू होते हैं, तो केंद्रीय निकाय को सीधे शेयरों और वित्तीय सहायता पर अधिकार मिल सकता है, जिससे राज्य की भूमिका घटेगी।

प्रश्न 2: इस अधिनियम के खिलाफ कानूनी चुनौती की संभावनाएँ क्या हैं?

उत्तर: कई कृषि वादी समूह और राज्य सरकारें संविधान की सातवें अनुसूची के उल्लंघन के आधार पर न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं।