शिवमोगा के सह्याद्री आर्ट्स कॉलेज ने विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को ‘प्रैक्टिस प्रोफेसर’ के रूप में आमंत्रित किया। छात्रों को वास्तविक अनुभवों से सीखने का अवसर मिला, जिससे शैक्षणिक विकास में नई दिशा मिली।

  • विशेषज्ञों ने वास्तविक जीवन के उदाहरणों से शिक्षा को समृद्ध किया।
  • छात्रों को सामाजिक और पेशेवर मुद्दों की गहरी समझ मिली।
  • कॉलेज ने अनुभव‑आधारित शिक्षण को भविष्य की रणनीति बना लिया।

शिवमोगा स्थित सह्याद्री आर्ट्स कॉलेज ने इस सोमवार अपने परिसर में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को ‘प्रैक्टिस प्रोफेसर’ के रूप में आमंत्रित किया। इन विशेषज्ञों ने छात्रों को अपने‑अपने क्षेत्रों की गहरी जानकारी और वास्तविक केस स्टडीज प्रस्तुत किए।

कर्नाटक राज्य रैथा संघ और हरीसे सेना के नेता एच.आर. बसवराजप्पा ने किसानों के आंदोलन पर प्रकाश डाला, किसानों के संघर्ष का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य समझाया और वर्तमान नीतियों के प्रभावों पर चर्चा की।

समुदाय रेडियो शिवमोगा एफएम के निदेशक जी.एल. जनार्दन ने स्थानीय मीडिया की भूमिका, ग्रामीण संवाद और सूचना प्रसार के महत्व को समझाते हुए अपने अनुभव साझा किए।

शिवमोगा सिटी कॉर्पोरेशन के सेवानिवृत्त अधिकारी नगेंद्र ने शहरी नियोजन, बुनियादी ढांचा विकास और सार्वजनिक सेवाओं की चुनौतियों पर अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए।

कुवेम्पू विश्वविद्यालय के सुब्रमण्यम ने शैक्षणिक अनुसंधान, भाषा संरक्षण और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण पर विस्तृत व्याख्यान दिया।

कॉलेज के प्रिंसिपल सरज अहमद ने कहा कि अनुभव‑आधारित शिक्षण छात्रों की शैक्षणिक प्रगति के लिए आवश्यक है और यह सामाजिक समझ को भी गहरा करता है। उन्होंने इस पहल को भविष्य में नियमित कार्यक्रम बनाने की इच्छा जताई।

कार्यक्रम समन्वयक मेती मलिकरजुना, शम्भुलिंग मुर्ति, एम. पूर्वचर और अन्य प्रमुख सदस्य उपस्थित थे, जिन्होंने इस नवाचार को सफल बनाने में सहयोग दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

‘प्रैक्टिस प्रोफेसर’ मॉडल का उद्भव पश्चिमी विश्वविद्यालयों में हुआ, जहाँ उद्योग विशेषज्ञों को नियमित रूप से पढ़ाने के लिए आमंत्रित किया जाता था। भारत में यह अवधारणा पिछले कुछ वर्षों में धीरे‑धीरे लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि शैक्षणिक संस्थानों को रोजगार‑उन्मुख कौशल की जरूरत महसूस हो रही है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि वास्तविक‑विश्व विशेषज्ञों का सीधा संपर्क छात्रों की रोजगार क्षमता को 30% तक बढ़ा सकता है और विश्वविद्यालय‑उद्योग सहयोग को सुदृढ़ करता है।

"जब छात्रों को फील्ड के वास्तविक अनुभव सुनने को मिलते हैं, तो उनकी सीखने की प्रेरणा और व्यावहारिक समझ दोनों ही बढ़ती है," कहा शिक्षा विश्लेषक डॉ. अंजलि मेहता ने।
Did You Know?: विश्व के शीर्ष 10 विश्वविद्यालयों में से 7 ने पहले ही अपने पाठ्यक्रम में ‘प्रैक्टिस प्रोफेसर’ को शामिल किया हुआ है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह कार्यक्रम नियमित रूप से आयोजित होगा?
उतर: कॉलेज इस मॉडल को वार्षिक रूप से दोहराने की योजना बना रहा है, जिससे अधिक छात्रों को लाभ मिले।

प्रश्न 2: क्या बाहरी विशेषज्ञों को कोई शुल्क देना पड़ेगा?
उतर: नहीं, इस पहल में सभी विशेषज्ञ स्वयंसेवी आधार पर भाग ले रहे हैं, जिससे छात्रों को निःशुल्क ज्ञान प्राप्त हो रहा है।