कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी की मुलाकात पर बीजेपी ने टनल रोड परियोजना को लाभप्रदता के आरोप लगाए। यह विवाद लल्बाग बॉटैनिकल गार्डन की हरित सतह और सार्वजनिक पार्कों के दावे को लेकर भी ज्वलंत हो गया है।
- भाजपा ने अडानी समूह को टनल रोड के सबसे कम बोलीदाता बताकर राजनीतिक हमला किया।
- कांग्रेस सरकार ने सार्वजनिक पार्कों की 5% जमीन को निजी उपयोग के लिए मंजूरी दी, जिससे लल्बाग को खतरा है।
- परियोजना की लागत अनुमान से 24‑28% अधिक है, जिससे वित्तीय जोखिम बढ़ता है।
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और अडानी समूह के प्रमुख गौतम अडानी के बीच रविवार को हुई शिष्टाचारिक मुलाकात ने राजनीतिक ध्रुवीकरण को तेज़ कर दिया। बीजेपी ने इस मुलाकात को टनल रोड परियोजना में अडानी के हितों से जोड़ते हुए कांग्रेस सरकार पर सार्वजनिक संपत्ति की बिक्री का आरोप लगाया।
बेंगलुरु में प्रस्तावित 16.75 किमी लंबा टनल रोड, जो हेब्बल से सिल्क बोर्ड तक उत्तर‑दक्षिण धुरी को जोड़ता है, पर लागत, संरेखण और लल्बाग बॉटैनिकल गार्डन पर संभावित असर को लेकर लगातार विरोध रहा है। इस परियोजना के दो पैकेजों के लिए अडानी समूह सबसे कम बोलीदाता निकला, पर उनकी बोली सरकारी अनुमान से 24‑28% अधिक है।
| पैकेज | सरकारी अनुमान (करोड़ ₹) | अडानी का बोली (करोड़ ₹) | विवादास्पद अंतर |
|---|---|---|---|
| हेब्बल‑सेशाद्री रोड | 8,770 | 10,867 | +24% |
| सेशाद्री‑स्ट जॉन्स अस्पताल | 8,928 | 11,400 | +28% |
बीजेपी के नेता आर. अशोक ने विधानसभा में कहा कि कांग्रेस सरकार शहर के पार्कों को निजी वाणिज्यिक उपयोग के लिए 5% तक हस्तांतरित करने की नई विधि से अडानी को लाभ पहुंचा रही है। उन्होंने इसे "शहर की फेफड़ों को काटने" का प्रयास बताया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the controversy could reshape Karnataka’s infrastructure policy, pushing the state toward more transparent bidding processes and possibly prioritizing metro expansion over costly tunnel projects.
"यदि टनल रोड की लागत अनुमान से इतनी अधिक है, तो यह सार्वजनिक धन के अपव्यय का स्पष्ट संकेत है," कहा शहरी विकास विशेषज्ञ डॉ. रितु पंत ने।
परियोजना का वित्तपोषण 40% सरकारी और शेष निजी निवेशकों द्वारा किया जाना है, लेकिन अभी तक कोई औपचारिक अनुबंध नहीं हुआ है। इस बीच, भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्य ने उच्च न्यायालय में परियोजना को चुनौती दी है, जिससे कानूनी लड़ाई की संभावना बढ़ गई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या टनल रोड परियोजना को अभी भी अनुमोदन मिला है?
उत्तर: हाँ, कर्नाटक सरकार ने बिल को पारित कर दिया है, लेकिन बोली प्रक्रिया अभी जारी है और कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है।
प्रश्न 2: अडानी समूह का टनल रोड में भागीदारी कैसे प्रभावित करेगी?
उत्तर: यदि अडानी समूह को अनुबंध मिलता है, तो यह कंपनी की बुनियादी ढांचा पोर्टफोलियो को विस्तारित करेगा, लेकिन सार्वजनिक विरोध और लागत ओवररन का जोखिम भी बढ़ेगा।