गौतम अदानी और मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार की मुलाक़ात के एक दिन बाद कर्नाटक सरकार ने दो विधायी संशोधन पारित किए, जिससे बेंगलुरु के उत्तर‑दक्षिण टनल रोड को कानूनी बाधाओं से मुक्त किया गया। यह कदम पीआईएल दायर करने वालों द्वारा ‘पिछली गलतियों को वैध बनाना’ कहा गया है।

  • कर्नाटक विधान सभा ने दो संशोधन बिल पास किए
  • टनल रोड को अब ‘स्वीकृत माना’ गया, जबकि पहले अनुमोदन की कमी थी
  • पीआईएल दायर करने वाले इसे retroactive regularisation कहते हैं

गौतम अदानी, अदानी ग्रुप के चेयरमैन, जिन्होंने बेंगलुरु के उत्तर‑दक्षिण टनल रोड प्रोजेक्ट में सबसे कम बोली लगाई, ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के घर व्यक्तिगत मुलाक़ात की। इस मुलाक़ात के अगले दिन, कर्नाटक सरकार ने दो विधायी संशोधन बिल पारित किए, जिससे प्रोजेक्ट के सामने खड़ी कानूनी बाधाएँ हट गईं।

पहला बिल, बेंगलुरु मेट्रोपॉलिटन लैंड ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी (संशोधन) बिल, 2026, ने 2022 के BMLTA अधिनियम के अंतर्गत शुरू हुए सभी प्रोजेक्ट्स को ‘स्वीकृत माना’ जाने की धारा जोड़ी। इससे पहले, हाई कोर्ट में दायर तीन सार्वजनिक हित याचिकाओं ने कहा था कि टनल रोड को BMLTA की मंजूरी नहीं मिली थी। अब इस संशोधन के तहत, वह ‘स्वीकृति प्राप्त’ माना जाएगा।

दूसरा बिल, कर्नाटक गवर्नमेंट पार्क्स (संरक्षण) (संशोधन) बिल, 2026, सार्वजनिक उपयोग के लिए पार्कों की 5% भूमि को विनियमित करने की अनुमति देता है। टनल रोड के निर्माण के लिए लालबाग से एक एकड़ और अस्थायी रूप से छह एकड़ ज़मीनी उपयोग की जरूरत होगी, जो पहले के 1975 के पार्क संरक्षण अधिनियम के तहत प्रतिबंधित था।

इन दोनों बिलों को राज्य कैबिनेट ने शुक्रवार को मंजूरी दी और सोमवार को दोनों सदनों में पारित किया गया, जबकि इस प्रक्रिया में भाजपा और जेडी(एस) के सांसदों ने विरोध स्वर उठाए। उन्होंने 'अदानी के लिए कार्पेट, बेंगलुरु जनता के लिए बिस्किट' जैसे नारे लगाते हुए सरकार पर अदानी समूह के साथ करीबी सम्बन्ध बनाने का आरोप लगाया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह विधायी बदलाव न केवल बेंगलुरु की शहरी योजना को परिवर्तित करता है, बल्कि निजी विश्वसनीयता को सार्वजनिक संसाधनों के साथ मिलाने के एक नए मॉडल का संकेत देता है, जिससे आगे के सार्वजनिक‑निजी साझेदारी (PPP) प्रोजेक्ट्स पर असर पड़ सकता है।

"ऐसे संशोधन न्यायिक निगरानी को कमजोर करते हैं और सार्वजनिक हित को व्यापारिक हित के ऊपर नहीं रख पाते," कहते हैं शहरी परिवहन विशेषज्ञ सत्या अरिकुत्रम्।
Did You Know?: BMLTA अधिनियम 2022 को लागू करने के लिए प्राधिकरण की स्थापना 2024 तक नहीं हुई थी, जिससे कई बड़े प्रोजेक्ट्स अनिश्चित स्थिति में रहे।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या टनल रोड प्रोजेक्ट अब बिना किसी कानूनी बाधा के आगे बढ़ेगा?

उत्तर: विधायी संशोधन से आधिकारिक तौर पर परियोजना को स्वीकृति मिली है, लेकिन हाई कोर्ट के पिलों का अंतिम निर्णय अभी भी प्रभावी रहेगा।

प्रश्न 2: लालबाग के पार्कों से ज़मीनी उपयोग का क्या असर होगा?

उत्तर: संशोधित कानून के तहत 5% भूमि की अलियनशन की अनुमति है, परंतु पर्यावरणीय समूह इस कदम को हरा-भरा सार्वजनिक स्थान घटाने के रूप में देख रहे हैं।