कर्नाटक विधानसभा ने बिना बहस के रजिस्ट्रीशन (कर्नाटक संशोधन) बिल, 2026 को पारित किया, जिससे दस्तावेज़ों की ई-रजिस्ट्रेशन संभव होगी। यह कदम शहरी क्षेत्रों में धोखाधड़ी को रोकते हुए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को तेज़ करेगा।
- दूरस्थ संपत्ति पंजीकरण के लिए नया बिल पास
- ई-रजिस्ट्रेशन और डिजिटल सर्टिफ़िकेट वितरण
- धोखाधड़ी पर कड़ी सजा और पोर्टल सुरक्षा
कर्नाटक विधान सभा ने सोमवार को रजिस्ट्रेशन (कर्नाटक संशोधन) बिल, 2026 को बिना बहस के पारित किया, जो राज्य भर में सब-रजिस्ट्रार कार्यालयों में दोनों पक्षों की शारीरिक उपस्थिति के बिना संपत्ति पंजीकरण की सुविधा देगा।
राजस्व पोर्टफोलियो संभालने वाले उपमुख्यमंत्री जी. परमेेश्वर ने बताया कि यह बिल अनिवार्य पंजीकरण योग्य दस्तावेज़ों की ई-रजिस्ट्रेशन को सक्षम करेगा और एक केंद्रीकृत वर्चुअल वितरण प्रणाली के माध्यम से प्रमाणित प्रतियां जारी करेगा, जिससे देरी कम होगी।
बिल में पोर्टल या सॉफ़्टवेयर में धांधली या हैकिंग के लिये दंड का प्रावधान भी शामिल है, साथ ही शहरी क्षेत्रों में अवैध पंजीकरण को रोकने के लिये प्रॉपर्टी‑संबंधित सॉफ़्टवेयर को एकीकृत करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अतिरिक्त, बिल में सब‑रजिस्ट्रारों द्वारा उचित ड्यू‑डिलिजेंस सुनिश्चित करने, पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने और सार्वजनिक हित में कार्य करने के उपाय सम्मिलित हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that डिजिटल रजिस्ट्रेशन की यह पहल न केवल कर्नाटक के रियल एस्टेट बाजार को पारदर्शी बनाएगी, बल्कि निवेशकों के लिए प्रक्रियात्मक जोखिम को भी घटाएगी, जिससे आर्थिक विकास को गति मिलेगी।
"ई-रजिस्ट्रेशन से कर्नाटक में भूमि लेन‑देनों की गति दोगुनी हो सकती है," कहा विशेषज्ञ ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या इस बिल के तहत सभी प्रकार की संपत्ति पंजीकरण ई-रजिस्ट्रेशन के लिये उपलब्ध होंगी?
उत्तर: हाँ, बिल में निर्दिष्ट सभी अनिवार्य पंजीकरण योग्य दस्तावेज़ों को डिजिटल माध्यम से पंजीकृत किया जा सकेगा।
प्रश्न 2: पोर्टल सुरक्षा के लिये कौन से उपाय लागू किए जाएंगे?
उत्तर: धोखाधड़ी या हैकिंग के लिये कड़ी दंडात्मक प्रावधान, दो‑स्तरीय प्रमाणीकरण और नियमित सॉफ़्टवेयर ऑडिट तय किए गए हैं।