अालनाल्लूर, पल्लक्कड़ के 16 वर्षीय अादिल का सड़क दुर्घटना में गंभीर चोटें आईं और 23 अगस्त को ब्रेन स्टेम डैथ हो गया। उसके माता‑पिता ने अंगदान की इच्छा जताई, जिससे केरल के तीन रोगियों को नई जिंदगी मिली।
- अादिल की मृत्यु के बाद उसके अंग दो अस्पतालों में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित हुए
- केरल राज्य अंगदान संगठन (K‑SOTTO) ने प्रक्रिया का समन्वय किया
- यह केस राज्य में अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने का उदाहरण बन गया
अालनाल्लूर, पल्लक्कड़ के 16 वर्षीय छात्र पी.एच. अादिल ने 21 अगस्त को मनर्माला (परिन्थलमनना) के करीब एक दोपहिया वाहन में अपने मित्र के साथ यात्रा के दौरान एक कार से टकराव के बाद गंभीर चोटें झेली। प्रारम्भ में उसे मौला हस्पताल, परिन्थलमनना में भर्ती किया गया, फिर कोज़िकोडे के एस्टर एमआईएमएस में स्थानांतरित किया गया।
अादिल को गंभीर मस्तिष्क क्षति के कारण 23 अगस्त को रात 9:48 बजे ब्रेन स्टेम डैथ घोषित किया गया। उसके परिवार ने तुरंत अंगदान की इच्छा व्यक्त की, जिससे केरल स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइज़ेशन (K‑SOTTO) ने संपर्क स्थापित किया।
K‑SOTTO ने कोज़िकोडे के एस्टर एमआईएमएस, कोज़िकोडे गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और बेबी मेमोरियल अस्पताल में उपयुक्त रोगियों की पहचान की। अादिल का लिवर एस्टर एमआईएमएस के एक रोगी को दिया गया, जबकि उसके दोनों किडनी कोज़िकोडे के दो अलग‑अलग अस्पतालों में दो रोगियों को मिल गईं।
अादिल की इस आत्मीय बलिदान ने न केवल तीन रोगियों को नई जिंदगी दी, बल्कि केरल में अंगदान के प्रति सार्वजनिक जागरूकता को भी बढ़ाया। पिछले पाँच वर्षों में केरल ने भारत में सबसे अधिक अंग प्रत्यारोपण दर हासिल की है, और यह केस इस प्रवृत्ति को सुदृढ़ करता है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that such high‑profile organ donation cases significantly boost donor registration rates, especially among youth in South India, where cultural hesitations have historically limited participation.
“अादिल की कहानी यह साबित करती है कि जीवन‑दान एक सामाजिक जिम्मेदारी है, न कि केवल व्यक्तिगत निर्णय।” – डॉ. रवींद्रन HR, ट्रांसप्लांट सर्जन
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: अंगदान प्रक्रिया में कौन‑कौन से कदम शामिल होते हैं?
उत्तर: रोगी की मेडिकल फिटनेस, कानूनी अनुमति, अंगों का परीक्षण, और प्रत्यारोपण के लिये अस्पतालों के बीच समन्वय।
प्रश्न 2: क्या परिवार की सहमति के बिना भी अंगदान संभव है?
उत्तर: भारत में कानूनी तौर पर केवल परिवार की लिखित सहमति के बाद ही अंग प्रत्यारोपण किया जा सकता है।