एल नीनो के कारण दो संयुक्त जलाशयों में कम प्रवाह को देखते हुए KRMB ने स्रीसाईलम और नगरजुना सार जल को केवल पेयजल की जरूरतों के लिए ही बाँटने का फैसला किया। तेलंगाना ने 50% शेयर की माँग की, जबकि आंध्र प्रदेश ने मौजूदा 66‑34 अनुपात को बरकरार रखने पर ज़ोर दिया।

  • स्रीसाईलम और नगरजुना सार जल केवल पेयजल के लिये उपलब्ध
  • आगे की मीटिंग 4 सितंबर को तय, शेयर अनुपात तय होगा
  • तेलंगाना 50% शेयर की मांग, आंध्र प्रदेश 66‑34 अनुपात पर कायम

कृष्णा नदी प्रबंधन बोर्ड (KRMB) की त्रि‑सदस्यीय समिति ने सोमवार को यह स्पष्ट किया कि स्रीसाईलम और नगरजुना सार (NSP) जलाशयों में उपलब्ध जल को केवल पीने के लिए उपयोग किया जाएगा, कृषि सिंचाई के लिये नहीं। यह कदम एल नीनो के कारण जल प्रवाह में गिरावट और दो जलाशयों में कम भंडारण स्तर को देखते हुए उठाया गया।

वर्तमान जल स्तर और प्रवाह

सोमवार शाम 6 बजे तक स्रीसाईलम जलाशय में 166.7 टीएमसी फ़ीट जल संग्रहित था, जबकि इसकी पूरी क्षमता 215.8 टीएमसी फ़ीट है। नगरजुना सार में 178.3 टीएमसी फ़ीट जमा था, जो 312 टीएमसी फ़ीट की अधिकतम क्षमता का 57% है। दोनों जलाशयों में प्रवाह क्रमशः 206.67 और 75.6 टीएमसी फ़ीट दर्ज किया गया, जो कर्नाटक‑महाराष्ट्र के अपस्ट्रीम प्रोजेक्ट्स और स्थानीय वर्षा से आया।

राज्यीय मांगें और वर्तमान उपयोग

आंध्र प्रदेश ने पोटिरेड्डीपाडु हेड रेगुलेटर और मलयला‑हांद्री नीवा प्रणाली के माध्यम से 11,050 क्यूसेक जल निकाला, जबकि तेलंगाना ने कालवाकुर्ती लिफ्ट के लिये 2,400 क्यूसेक जल लिया। तेलंगाना ने नगरजुना सार से 2,000 क्यूसेक जल पीने के लिये भी निकाला। दोनों राज्य जलशक्ति उत्पादन के बाद जल को क्रमशः नगरजुना सार में छोड़ रहे हैं।

विवादित शेयर अनुपात

तेलंगाना के अभियांत्रिकी प्रमुख ओ.वी. रामेश बाबू ने बताया कि राज्य ने दोनों जलाशयों के जल का 50% शेयर मांगा है, क्योंकि केवल पीने के लिये उपयोग होगा और राज्य के कृष्णा बेसिन की जनसंख्या अधिक है। आंध्र प्रदेश ने मौजूदा 66‑34 (AP‑TG) अनुपात को बरकरार रखने की मांग की, जिससे दोनों राज्यों के बीच तनाव बढ़ गया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that water allocation decisions in the Krishna basin have far‑reaching impacts on agriculture, industry, and urban water security across two of India’s most populous states. A shift to drinking‑water‑only usage could tighten irrigation supplies, affecting crop yields and farmer incomes, while also highlighting the growing climate‑driven water scarcity challenges in South India.

"El Niño‑driven deficits force water boards to prioritize human consumption over agriculture, a trend likely to repeat in future climate scenarios," says Dr. Anil Kumar, hydrology expert at Indian Institute of Water Management.
Did You Know?: स्रीसाईलम जलाशय 1959 में बना था और यह भारत‑तमिलनाडु सीमांत पर स्थित सबसे ऊँचा जलभंडारण परियोजना है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह निर्णय कृषि उत्पादन पर असर डालेगा?
उत्तर: हाँ, सिंचाई के लिये जल उपलब्धता घटने से फसल उत्पादन में कमी की संभावना है।

प्रश्न 2: अगली मीटिंग में क्या तय होगा?
उत्तर: 4 सितंबर को होगी, जहाँ दोनों राज्यों के बीच जल शेयर का प्रतिशत तय किया जाएगा।