पश्चिम बंगाल में अन्नपूर्णा भंडार योजना के लाभों को लेकर ममता बनर्जी और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के बीच तीखी बहस छिड़ गई है। विपक्ष ने सरकार पर जाति‑धर्म के आधार पर लाभ रोकने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने 1.45 करोड़ लाभार्थियों की संख्या बताई।

  • विपक्ष ने भाजपा‑शासित सरकार पर अन्नपूर्णा भंडार लाभों को रोकने का आरोप लगाया।
  • ममता बनर्जी ने बाहर निकाले गए महिलाओं को समर्थन देने का आश्वासन दिया।
  • सुवेंदु अधिकारी ने 1.45 करोड़ लाभार्थियों का आंकड़ा बताया और शिकायत पोर्टल खोला।

अन्नपूर्णा भंडार योजना, जिसे 2021 में ममता बनर्जी ने महिलाओं को मासिक नकद सहायता देने के लिए शुरू किया, पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक प्रमुख सामाजिक सुरक्षा उपकरण बन गई है। प्रारंभ में ₹1,500 प्रति माह की राशि 2.2 करोड़ महिलाओं को दी गई थी।

हाल ही में विभिन्न जिलों में महिलाएँ इस योजना के तहत ₹3,000 की राशि न मिलने का विरोध कर रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें लाभ नहीं मिल रहा है, जबकि अन्य को मिल रहा है।

ममता बनर्जी ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा, "चुनाव से पहले भाजपा ने इस योजना के पात्रता पर चर्चा नहीं की। अब भाजपा तय करेगी कौन पात्र है? महिलाओं को जाति और धर्म के आधार पर लाभ नहीं मिल रहा है।" उन्होंने इसको भाजपा के खिलाफ एक राजनीतिक हथियार बना लिया।

इसके जवाब में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि अब तक 1.45 करोड़ लाभार्थियों को अन्नपूर्णा योजना का धन वितरित किया जा चुका है और सभी वर्गों के लोगों को समान रूप से लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 19.20 लाख मुसलमान भी इस योजना से लाभान्वित हुए हैं।

अधिकारियों ने एक ऑनलाइन पोर्टल खोल दिया है जहाँ नागरिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं यदि उन्हें लाभ नहीं मिला या यदि कोई अयोग्य व्यक्ति लाभ ले रहा है। यह पोर्टल पारदर्शिता बढ़ाने के उद्देश्य से बनाया गया है।

राजनीतिक माहौल को देखते हुए, यह विवाद आगामी विधानसभा चुनावों में दोनों पक्षों के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है। अन्नपूर्णा भंडार को अब केवल सामाजिक सहायता नहीं, बल्कि राजनीतिक जीत के साधन के रूप में देखा जा रहा है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

त्रिणामूल कांग्रेस के शासनकाल में, योजना का प्रारंभिक चरण 2021 में था, जब 2.2 करोड़ महिलाओं को ₹1,500 प्रति माह दिया गया था। नई सरकार ने इस संख्या को घटाकर 1.45 करोड़ कर दिया, जिससे लाभार्थियों के बीच असंतोष बढ़ा।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that welfare schemes like Annapurna Bhandar are increasingly becoming battlegrounds for political narratives in West Bengal, influencing voter sentiment ahead of the 2027 state elections.

"अन्नपूर्णा भंडार पश्चिम बंगाल में कल्याण राजनीति की कसौटी बन चुका है," राजनीतिक विश्लेषक डॉ. अरिंदम सेन कहते हैं।
Did You Know?: इस योजना को 2022 में "लक्ष्मी भंडार" से बदलकर अन्नपूर्णा भंडार नाम दिया गया था।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अन्नपूर्णा भंडार योजना में कौन पात्र है?

उत्तर: 25 से 60 वर्ष की महिलाओं के लिए, चाहे वह हिन्दू हों या मुस्लिम, योजना के तहत लाभ उपलब्ध है।

प्रश्न 2: यदि मुझे लाभ नहीं मिला तो क्या करूँ?

उत्तर: आप राज्य सरकार के आधिकारिक पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं और आगे की कार्रवाई की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।