पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने संसद की संयुक्त समिति के समक्ष "एक राष्ट्र, एक चुनाव" प्रस्ताव को 'भयानक' और 'असंवैधानिक' कहा। उन्होंने पाँच‑साल की विधान अवधि को घटाने को संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध बताया।

  • चिदंबरम ने प्रस्ताव को "भयानक" और "असंवैधानिक" कहा
  • बिलों का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभा चुनावों को एकसाथ करना है
  • समानांतर चुनावों की ऐतिहासिक प्रथा 1960‑यों में समाप्त हुई

पूर्व गृह और वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने सोमवार को संसद की संयुक्त समिति के समक्ष “एक राष्ट्र, एक चुनाव” पहल को "भयानक" और "असंवैधानिक" शब्दों में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि किसी भी विधानसभा को पाँच साल के बाद समाप्त करना संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन है।

चिदंबरम ने यह भी कहा कि उनका विवेक उन्हें इन विधेयकों को समर्थन नहीं करने देता, जबकि सरकार के पास दो‑तिहाई बहुमत नहीं है जिससे यह बिल पारित नहीं हो पाएँगे।

त्राणमुक्ति कांग्रेस (टीएमसी) की सदस्य सागरिका घोष ने भी इस प्रस्ताव का विरोध किया, यह तर्क देते हुए कि इससे चुनाव आयोग को "असीम" शक्ति मिल जाएगी। लगभग दस पद्म पुरस्कारधारियों, जिनमें तरलचन सिंह, नवीन खन्ना, मीनााक्षी जैन और निरु कुमार शामिल हैं, ने भी अलग‑अलग राय व्यक्त की।

यह विधेयक, संविधान (129वां संशोधन) बिल, 2024 और संघ क्षेत्रों विधेयक (संशोधन) बिल, 2024, का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभा के चुनावों को समन्वित करना है। इस पहल को पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा अध्यक्षता किए गए उच्च‑स्तरीय पैनल ने सुझाया था, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल थे।

इतिहास में, 1951‑52 से 1967 तक भारत ने प्रथम, द्वितीय, तृतीय और चतुर्थ लोकसभा के चुनाव एक साथ करवाए थे। 1968‑69 में कई राज्यों की विधानसभा का समय से पहले विघटन हुआ, जिससे समकालिक चुनावों का क्रम टूट गया। तब से ही चुनावों का समय‑सारणी असंतुलित रही है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that यदि "एक राष्ट्र, एक चुनाव" लागू हो जाता है तो प्रशासनिक लागत में उल्लेखनीय कमी हो सकती है, परंतु लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व की निरंतरता और क्षेत्रीय मुद्दों की विशिष्टता को खतरा हो सकता है। यह प्रस्ताव भारत की संघीय संरचना पर गहरा प्रभाव डालेगा।

"संविधान की मूल संरचना को बिना दो‑तिहाई बहुमत के बदलना लोकतंत्र के लिए जोखिम है," एक संवैधानिक विशेषज्ञ ने कहा।
Did You Know?: 1951‑52 के पहले आम चुनाव में 173 करोड़ मतदाता ने मतदान किया था, जो आज के आँकड़ों से कम था।

Frequently Asked Questions

क्या "एक राष्ट्र, एक चुनाव" से चुनाव खर्च घटेगा?
समर्थकों का तर्क है कि समानांतर चुनावों से लॉजिस्टिक खर्च कम होगा, परंतु असंगत राज्य‑धाराओं की पुनःस्थापना अतिरिक्त लागत ला सकती है।

क्या इस प्रस्ताव को संविधान में संशोधन की आवश्यकता है?
हाँ, विधेयक में कहा गया है कि पाँच‑साल की विधान अवधि को घटाने के लिए संविधान के मूल ढांचे में परिवर्तन आवश्यक होगा।