दिल्ली में CJP विरोध के दौरान पेलेट गन से घायल हुए साहिल ने अपने संघर्ष की कहानी साझा की। 150 से अधिक छर्रे, देर से दर्ज FIR और सुरक्षा उपायों पर सवाल उठते हैं।
- साहिल को पेलेट गन से गंभीर चोटें आईं
- पुलिस ने FIR दर्ज करने में कई घंटे का विलंब किया
- प्रदर्शन में सुरक्षा उपायों की कमी पर सवाल उठे
साहिल, एक टैक्सी ड्राइवर, ने बताया कि वह CJP विरोध में भाग लेने के बाद पेलेट गन से गंभीर रूप से घायल हुआ। घटना के बाद वह अस्पताल में भर्ती हुआ और अपनी दर्दनाक आपबीती ABP News को बताई।
25 मार्च को दिल्ली के वेस्टर्न सर्किट कोर्ट के सामने आयोजित विरोध में पुलिस ने भीड़ नियंत्रण के लिए पेलेट गन का प्रयोग किया। रिपोर्टों के अनुसार, एक ही क्षण में 150 से अधिक छोटे धातु के गोले साहिल की ओर मारे गए, जिससे उसकी आँख और छाती में चोटें आईं।
पुलिस ने प्रारम्भ में घटना को मामूली बताया और FIR दर्ज करने में कई घंटे का समय लगा। यह देरी साहिल और कई अन्य पीड़ितों के लिए न्याय की पहुँच को कठिन बना देती है।
CJP विरोध का इतिहास 2023 से लगातार जारी है, जहाँ विभिन्न नागरिक समूहों ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सड़कों पर उतरना शुरू किया। इस दौरान पेलेट गन का उपयोग कई बार विवादास्पद रहा है, क्योंकि यह गैर-घातक मानते हुए भी गंभीर शारीरिक क्षति कर सकता है।
ऐतिहासिक रूप से, भारत में 2018 के दिल्ली में हुए समान प्रदर्शन में भी कई नागरिकों को पेलेट गन से चोटें आई थीं। इस घटना ने राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा नीति और गैर-घातक हथियारों के उपयोग पर पुनर्विचार को प्रेरित किया।
पुलिस की इस कार्रवाई ने कई मानवाधिकार संगठनों की नज़रें आकर्षित की हैं, जो सार्वजनिक सुरक्षा और अधिकारों के संतुलन की मांग कर रहे हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the unchecked use of pellet guns in civilian protests erodes public trust in law enforcement and raises serious questions about proportionality in crowd-control tactics.
"पेलेट गन का उपयोग मानव अधिकारों के संदर्भ में अत्यधिक विवादास्पद है और इसके दुरुपयोग से सार्वजनिक विश्वास क्षीण होता है," कहते हैं मानवाधिकार वकील अंजली तिवारी।
Frequently Asked Questions
- पेलेट गन से कितनी गंभीर चोटें लग सकती हैं? यह गन छोटे धातु के गोले मारती है, जो आँख, त्वचा और हड्डी में गंभीर क्षति कर सकता है।
- पुलिस को FIR दर्ज करने में देरी क्यों हुई? अधिकारियों ने प्रारम्भिक रिपोर्ट को कम गंभीर माना और प्रक्रिया में औपचारिकता में देरी की।