रामनाथपुरम के डिस्ट्रिक्ट क्राइम ब्रांच ने 80 सेंटन प्राइमेट प्रॉपर्टी के फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से हुए बड़े जाल को उजागर किया। हजा बानू की शिकायत पर चार आरोपी को गिरफ्तार किया गया और साक्ष्य जब्त किए गए।
- 80 सेंटन जमीन का फर्जी बिक्री दस्तावेज़
- चार प्रमुख आरोपी, जिनमें मुख्य दिमाग जाफ़र अली
- पीओए का विदेशी रूप धोखा, पुलिस ने दस्तावेज़ जब्त किए
जाल की रूपरेखा
रमनाथपुरम के डिस्ट्रिक्ट क्राइम ब्रांच (DCB) ने 20 अगस्त 2026 को हजा बानू की शिकायत के बाद एक बड़े जमीन फर्जीकरण जाल को उजागर किया। बानू, जो वानी गांव की निवासी हैं, के पास साक्करकोट्टई में 80 सेंटन जमीन थी। 2021 में जाफ़र अली ने इस जमीन को खरीदने की इच्छा जाहिर की, लेकिन भुगतान के लिए अग्रिम माँग पर बानू ने हिचकिचाहट जताई।
अली ने बानू के पासपोर्ट की कॉपी को समझौते के मसौदे के बहाने ले लिया और इसे विदेशी पावर ऑफ अटॉर्नी (PoA) बनवाने के लिए महेश्वरन (A4) को शामिल किया। 27 दिसंबर 2021 को महेश्वरन ने जाफ़र अली के नाम पर एक फर्जी मलयेशियाई PoA तैयार किया। इस दस्तावेज़ के आधार पर दो वैध बिक्री दस्तावेज़ तैयार किए गए, पहला 13 जनवरी 2022 को 8.18 सेंटन जेसिना बेगम को और दूसरा 28 जून 2025 को 71.82 सेंटन सेंटिलकुमार को।
संबंधित आरोपियों की भूमिका
जाफ़र अली (A1) के अलावा, उसके सहयोगी चंद्रकुमार (A2) और सेंटिलकुमार (A3) ने फर्जी दस्तावेज़ों के बारे में पूर्ण जानकारी के बावजूद संपत्ति खरीदी। A2 और A3 ने इस बात को जानबूझकर किया कि जमीन की वैधता को छुपाने के लिए यह जाल बनाया गया था।
पुलिस ने जांच में पुष्टि की कि A1, A2 और A4 पिछले 16 वर्षों से रियल एस्टेट व्यवसाय में सक्रिय हैं और इस जाल को चलाने में प्रमुख भूमिका निभा रहे थे। ऑपरेशन के दौरान फर्जी मलयेशियाई PoA और अन्य साक्ष्य जब्त किए गए।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that forged foreign Power of Attorney documents are increasingly used to bypass local land‑ownership checks, putting ordinary citizens at risk of losing ancestral property. The case underscores the need for stricter verification mechanisms and public awareness.
"फर्जी PoA से संपत्ति की बिक्री को वैध बना देना एक गंभीर अपराध है, जिसके खिलाफ कड़ी सज़ा होनी चाहिए," कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ रवीश कुमार।
इतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत में रियल एस्टेट धोखाधड़ी का इतिहास पुराना है, विशेषकर जब विदेशी दस्तावेज़ों को वैधता का प्रमाण माना जाता है। पिछले दशकों में कई समान मामलों में आरोपियों ने पासपोर्ट, पैन कार्ड जैसी संवेदनशील दस्तावेज़ों की चोरी करके फर्जी PoA तैयार किए हैं। इस प्रकार के जाल को रोकने के लिए कई राज्य सरकारों ने दस्तावेज़ सत्यापन प्रक्रिया को कड़ी करने के प्रस्ताव पेश किए हैं।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: फर्जी PoA की पहचान कैसे करें?
उत्तर: दस्तावेज़ में हस्ताक्षर, मोहर, और प्रमाणन के स्रोत की जाँच करें; यदि दस्तावेज़ विदेशी दिखता है तो स्थानीय रजिस्ट्री में इसकी पुष्टि आवश्यक है।
प्रश्न 2: यदि मैंने फर्जी दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर कर दिया है तो क्या करूँ?
उत्तर: तुरंत स्थानीय पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट दर्ज कराएँ और कानूनी सलाह लें; समय पर कार्रवाई से नुकसान को कम किया जा सकता है।