रanchi साइबर पुलिस ने ‘X’ को @JPSCreformanch खाते की पूरी पहचान और गतिविधि लॉग देने का कानूनी नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई झारखंड सरकार के खिलाफ फैलाई गई झूठी जानकारी को रोकने के उद्देश्य से की गई है।
- ‘X’ को खाते की पूरी पहचान और लॉग देने का नोटिस जारी।
- जारी नोटिस का कारण झूठी और भ्रामक जानकारी का प्रसार।
- जिला पुलिस ने FIR दर्ज कर सार्वजनिक शांति बनाए रखने की चेतावनी दी।
पृष्ठभूमि और नोटिस का विवरण
रanchi की साइबरक्राइम यूनिट ने 22 अगस्त को ‘X’ को एक कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें @JPSCreformanch (JPSC‑JSSC सुधार मंच) खाते की सभी उपयोगकर्ता जानकारी और सक्रियता लॉग मांगे गए। नोटिस में कहा गया कि यह खाता झारखंड सरकार की कार्यवाही को लेकर “झूठी और निर्मित” वीडियो व फ़ोटो पोस्ट कर रहा है।
कानूनी आधार और आरोप
नोटिस के अनुसार, इस खाते पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 353 (जनसमुदाय में उत्पन्न शांति भंग), 196 (सार्वजनिक अधिकारी को झूठी सूचना), 356 (मानहानी) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 (अश्लील सामग्री का प्रकाशन) के तहत आरोप लगाए गए हैं।
पुलिस द्वारा जारी अतिरिक्त निर्देश
रanchi पुलिस ने ‘X’ के कानूनी प्रतिनिधियों को खाते‑धारक का पूरा नाम, पता, संपर्क नंबर, पंजीकृत ई‑मेल और 10 अगस्त से पहले के सभी लॉग‑इन‑आउट टाइम‑स्टैम्प व IP पतों की जानकारी देने का आदेश दिया। यह कदम सार्वजनिक शांति को बनाए रखने और अफवाहों को रोकने के लिए उठाया गया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले दो वर्षों में झारखंड में कई बार सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके सरकार की नीतियों को लेकर विरोध भड़काया गया है। 2024 में एक समान मामले में भी साइबर पुलिस ने आरोपी को पहचान प्रदान करने के लिए समान नोटिस जारी किया था, जिसके बाद कई झूठी पोस्ट हटाई गईं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that unchecked misinformation on regional platforms can rapidly destabilize local governance, especially during election cycles. By compelling ‘X’ to disclose data, the police aim to set a deterrent precedent against digital propaganda.
"डिजिटल दुरुपयोग को रोकना अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि कानूनी चुनौती बन चुका है," कहा साइबर‑क्राइम विशेषज्ञ प्रीता शर्मा ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या ‘X’ को इस नोटिस का पालन न करने पर दंड होगा?
उत्तर: हाँ, भारतीय दण्ड संहिता एवं आईटी एक्ट के तहत अनुत्तरदायित्व पर जुर्माना या जेल की सजा हो सकती है।
प्रश्न 2: इस खाते की पोस्टें किस हद तक झूठी मानी जाती हैं?
उत्तर: पुलिस ने पोस्टों को "साक्ष्य‑रहित और निर्मित" कहा है, जो सार्वजनिक भ्रम उत्पन्न करने के इरादे से प्रकाशित हुई थीं।