जापानी निवेश समूह सॉफ़्टबैंक ने भारतीय आईवीई लेंसकार्ट में 2.6% हिस्सेदारी, यानी 45 मिलियन शेयर, कुल ₹2,888 करोड़ में बेची। सौदा सोसाइते जेनराल, गोल्डमैन सैक्स और मोतीलाल ओसवाल की मध्यस्थता में हुआ।

  • सॉफ़्टबैंक ने 45 मिलियन लेंसकार्ट शेयर ₹2,888 करोड़ में बेचे।
  • यह 2.6% इक्विटी हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करता है।
  • सौदा सोसाइते जेनराल, गोल्डमैन सैक्स और मोतीलाल ओसवाल ने संचालित किया।

सॉफ़्टबैंक ग्रुप कॉर्पोरेशन ने भारतीय आईवीई लेंसकार्ट में अपनी 2.6% हिस्सेदारी, जो 45 मिलियन शेयरों के बराबर है, को ₹2,888 करोड़ में बेचा। यह ब्लॉक डील बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर दर्ज किया गया।

लेनदेन की मुख्य ब्रोकर एजेंसियों में सोसाइते जेनराल, गोल्डमैन सैक्स और मोतीलाल ओसवाल शामिल थे, जिन्होंने सौदे को सुगम बनाया।

2010 में स्थापित लेंसकार्ट ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों प्लेटफ़ॉर्म पर अपनी पकड़ बनाते हुए 700 से अधिक स्टोर खोल कर भारतीय eyewear बाजार में एक प्रमुख खिलाड़ी बन गया है, जिसकी वर्तमान वैल्यूएशन $2.5 बिलियन से अधिक है।

सॉफ़्टबैंक की यह बिक्री भारतीय स्टार्ट‑अप पोर्टफ़ोलियो से निरंतर निकासी की रणनीति को दर्शाती है, जैसा कि उसने पहले पेम्ट और ओयो जैसी कंपनियों से भी बाहर निकलना शुरू किया था।

विश्लेषकों के अनुसार, लेंसकार्ट में सॉफ़्टबैंक की शुरुआती निवेश पर अब लगभग 5.7 गुना रिटर्न मिला है, जिससे इस कदम की वित्तीय सफलता स्पष्ट होती है।

Historical Background

सॉफ़्टबैंक ने 2016 में भारत में प्रवेश किया, विभिन्न टेक‑स्टार्ट‑अप्स में निवेश किया और स्थानीय नियमों तथा बाजार स्थितियों के बदलते परिदृश्य के साथ अपने पोर्टफ़ोलियो को पुनः आकार दिया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that SoftBank’s exit could free up capital for newer high‑growth Indian ventures, while signaling confidence in the maturity of India’s startup ecosystem.

"SoftBank’s disciplined divestment underscores a shift towards profit‑realization rather than mere market presence," says market analyst Rohan Mehta.
Did You Know?: लेंसकार्ट ने 2022 में अपने पहले अंतरराष्ट्रीय स्टोर, सिंगापुर में खोले थे, जिससे उसकी वैश्विक विस्तार की योजना स्पष्ट होती है।

Frequently Asked Questions

Q: क्या इस बिक्री से लेंसकार्ट की भविष्य की फंडिंग पर असर पड़ेगा?

A: लेंसकार्ट को अभी भी कई निजी और संस्थागत निवेशकों से समर्थन मिल रहा है, इसलिए फंडिंग में बड़ा अंतर नहीं आएगा।

Q: सॉफ़्टबैंक की भारतीय निवेशों से बाहर निकलने की प्रवृत्ति का कुल पोर्टफ़ोलियो पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

A: यह रणनीति सॉफ़्टबैंक को नई अवसरों में पुन: निवेश करने की लचीलापन देती है और भारतीय स्टार्ट‑अप इकोसिस्टम के मूल्यांकन को भी सकारात्मक बनाती है।