भारत सरकार ने एशियाई खेलों के लिए 492 खिलाड़ियों की अंतिम सूची जारी की, जबकि फुटबॉल और हैंडबॉल टीमों को बाहर रखा गया। चयन मानदंडों पर कड़ा रुख दिखाते हुए, मंत्रालय ने बाहरी दबाव को अस्वीकार कर दिया है।

  • सरकार ने एशियन गेम्स के लिए 492 खिलाड़ियों की सूची प्रकाशित की
  • फ़ुटबॉल और हैंडबॉल टीमों को चयन से बाहर रखा गया
  • नियुक्ति मानदंडों पर कड़ा रुख और बाहरी दबाव को अस्वीकार

नई दिल्ली (स्पोर्ट्स ब्यूरो) – खेल मंत्रालय ने एशियन गेम्स 2026 के लिए चयन मानदंडों से समझौता न करने का स्पष्ट संकेत दिया है। 492 खिलाड़ियों की सूची में कई पूर्व मेडलिस्ट और लोकप्रिय खेलों के खिलाड़ी शामिल नहीं हैं, जिससे परिवारों और प्रशंसकों में असंतोष पला है।

मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, "यदि कोई खिलाड़ी सरकारी मानदंडों के आधार पर योग्य है, तो उसे अनदेखा नहीं किया जाएगा, परंतु हम केवल नामों को साफ‑साफ मंज़ूर नहीं कर सकते।" उन्होंने कहा कि एशियन टाइमिंग 100 मीटर में 10 सेकंड है, जबकि 15 सेकंड वाले धावक को भेजना असंभव है।

इसी मानदंड के तहत, व्यक्तिगत खेलों में पिछले संस्करण में शीर्ष‑छह और टीम खेलों में शीर्ष‑आठ स्थान प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों को प्राथमिकता दी जाती है, और अंतिम निर्णय सरकार के हाथ में रहता है।

टेनिस सूची पर विशेष रूप से विरोध उठाया गया है; केवल सात खिलाड़ी चयनित हुए, जिनमें दो महिलाएँ शामिल हैं। शीर्ष‑रैंक वाले साहजा यामलापल्ली जैसे नामों को बाहर किया गया, जिससे पूर्व सितारा रोहन बोपान्ना ने सवाल उठाए। इसी तरह, पैडल खिलाड़ी मनीका बत्रा और सवार अनुष अग्रवाल को भी चयन समिति ने बाहर किया, जिसमें अग्रवाल ने कोर्ट में याचिका दायर की परंतु राहत नहीं मिली।

27 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के उपलक्ष्य में एक व्यापक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिसमें मनीका बत्रा, दीपा कर्माकार, सैना नेहवाल, गगन नरंग और पी.आर. श्रीजेश जैसे खिलाड़ी युवा छात्रों को अपनी यात्रा और चुनौतियों के बारे में बताएंगे। यह कार्यक्रम 1500 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों, आईआईटी और आईआईएम सहित, में आयोजित होगा।

ऐसे कठोर मानदंडों के पीछे सरकार का उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय मंच पर प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाना है, जबकि घरेलू दबाव से बचने की कोशिश भी करता है। यह नीति भविष्य में भारत के एशियन खेलों में प्रदर्शन को कैसे प्रभावित करेगी, यह अब देखना बाकी है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that adherence to transparent selection criteria can boost athlete morale and improve India’s medal prospects, while also setting a precedent for other federations to resist political lobbying.

"एक स्पष्ट और निष्पक्ष चयन प्रक्रिया ही भारतीय खेलों की सच्ची प्रगति की कुंजी है," कहते हैं खेल विश्लेषक अंजली सिंह।
Did You Know?: एशियन गेम्स में भारत ने 2018 तक कुल 70 से अधिक पदक नहीं जीते थे, लेकिन 2022 में यह संख्या 120 तक बढ़ गई।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या चयन मानदंड बदल सकते हैं अगर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिस्पर्धा सामने आए?

उत्तर: वर्तमान में मानदंड स्थिर हैं; किसी भी बदलाव के लिए मंत्रालय और खेल संघों की सहमति आवश्यक होगी।

प्रश्न 2: चयनित नहीं हुए खिलाड़ियों को अपील करने का कोई तरीका है?

उत्तर: हाँ, वे संबंधित खेल संघ के अपील प्रक्रिया के तहत न्यायालय में याचिका दायर कर सकते हैं, परन्तु अंतिम निर्णय मंत्रालय के मानदंडों पर निर्भर रहेगा।