सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु मेडिकल ऑफ़िसर्स एसोसिएशन की याचिका पर विचार किया, जिसमें इन-सेवा डॉक्टरों के लिए NEET-SS का क्वालिफ़ाइंग पर्सेंटाइल घटाने की मांग की गई थी। कोर्ट ने केंद्र को इस मुद्दे पर स्पष्ट जवाब देने का आदेश दिया और मामले की आगे की सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित की।

  • सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को NEET-SS इन-सेवा कटऑफ़ पर जवाब देने के लिए कहा
  • 152 खाली सुपर स्पेशालिटी सीटें तमिलनाडु को वापस माँगी गईं
  • अगली सुनवाई 31 अगस्त को तय हुई

नई दिल्ली (24 अगस्त, 2026) – एक न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा के नेतृत्व में सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु मेडिकल ऑफ़िसर्स एसोसिएशन (TMOSA) द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई की, जिसमें इन-सेवा सरकारी डॉक्टरों के लिए NEET-SS (नेशनल एलीजेबिलिटी‑कम्प‑एंट्रेंस टेस्ट‑सुपर स्पेशालिटी) का क्वालिफ़ाइंग पर्सेंटाइल घटाने की मांग की गई थी।

TMOSA के वरिष्ठ वकील पी. विल्सन ने कोर्ट को बताया कि 2025‑2026 शैक्षणिक वर्ष के लिए तमिलनाडु ने 219 सुपर स्पेशालिटी सीटें इन-सेवा उम्मीदवारों के लिये आरक्षित की थीं, परन्तु दो चरणों के काउंसलिंग के बाद केवल 68 ही डॉक्टरों ने सीटें लीं, जिससे 152 सीटें खाली रह गईं।

विल्सन ने कहा कि 111 उम्मीदवार अभी भी प्रतीक्षा सूची में हैं और वे पिछले वर्षों की प्रथा के अनुसार क्वालिफ़ाइंग पर्सेंटाइल घटाने की आशा कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र से यह अनुरोध किया कि 152 खाली सीटों में से शेष 40 सीटें पूरी तरह से तमिलनाडु को वापस दी जाएँ।

केंद्रीय सरकार ने जवाब देते हुए बताया कि तमिलनाडु द्वारा स्थानांतरित 152 सीटों में से लगभग 40 अभी भी खाली हैं। सरकार ने कोर्ट को यह भी कहा कि यदि पर्सेंटाइल घटाया गया तो कई डॉक्टरों को इन‑सेवा श्रेणी में प्रवेश मिल सकता है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the outcome of this petition could set a precedent for how state‑reserved medical seats are treated nationwide, potentially affecting thousands of government doctors awaiting specialty training.

"यदि क्वालिफ़ाइंग पर्सेंटाइल घटाया गया, तो यह न केवल तमिलनाडु में बल्कि पूरे भारत में इन-सेवा डॉक्टरों की शिक्षण क्षमता को मजबूत करेगा," कहा स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ डॉ. रवींद्र सिंह ने।
Did You Know?: भारत में NEET‑SS के लिए कुल 12,000 से अधिक सुपर स्पेशालिटी सीटें हर वर्ष उपलब्ध होती हैं, जिनमें राज्य‑कोटा का बड़ा हिस्सा आरक्षित रहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को 31 अगस्त को फिर से सुनने का निर्देश दिया, जिससे केंद्र को अपनी स्थिति स्पष्ट करने का पर्याप्त समय मिलेगा। यह निर्णय भविष्य में अन्य राज्यों की समान आरक्षण नीतियों पर भी प्रभाव डाल सकता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या सभी 152 खाली सीटें अंततः तमिलनाडु को वापस मिलेंगी?

उत्तर: कोर्ट ने अभी तक अंतिम आदेश नहीं दिया है, लेकिन केंद्र को 40 सीटों को तुरंत वापस करने का निर्देश दिया गया है।

प्रश्न 2: क्वालिफ़ाइंग पर्सेंटाइल घटाने से किन डॉक्टरों को लाभ होगा?

उत्तर: उन सर्वेक्षण में जो वर्तमान पर्सेंटाइल से थोड़े नीचे रहे हैं, उन्हें नई सीमा में प्रवेश की संभावना बढ़ेगी।