रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत‑रूस के व्यापार में इस साल हुई वृद्धि का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया। ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु और हाई‑टेक क्षेत्रों में सहयोग के विस्तार को भी उन्होंने रेखांकित किया।

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  • पुतिन ने भारत‑रूस व्यापार‑वृद्धि का श्रेय मोदी को दिया
  • 2026 में दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय उछाल
  • ऊर्जा, उर्वरक, परमाणु ऊर्जा और हाई‑टेक सहयोग को नई दिशा मिली

पुतिन‑मोदी की प्रशंसा

मॉस्को में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने खुले तौर पर कहा कि इस साल भारत‑रूस व्यापार में वृद्धि का मुख्य कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का व्यक्तिगत ध्यान है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी की सक्रिय भागीदारी के बिना यह संभव नहीं था।”

व्यापार में वृद्धि के आँकड़े

2025 में दोनों देशों के बीच का व्यापार थोड़ा घटा था, पर 2026 में निर्यात‑आयात का कुल मूल्य 12 प्रतिशत बढ़ा, विशेषकर ऊर्जा और उर्वरक क्षेत्रों में। भारतीय किसान को समर्थन देने के लिए रूसी उर्वरक की आपूर्ति में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

ऊर्जा और उर्वरक सहयोग

पुतिन ने बताया कि रूस भारत को अतिरिक्त प्राकृतिक गैस और कोयला की आपूर्ति बढ़ा रहा है, जबकि उर्वरक की निरंतर सप्लाई भारतीय कृषि को स्थिरता प्रदान करेगी। यह सहयोग दोनों देशों के आर्थिक एजेंडे में प्रमुख जगह रखता है।

परमाणु और हाई‑टेक साझेदारी

परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग के लिए नई समझौते पर चर्चा हुई, जिसमें भारत के एटीओ के लिए रूसी तकनीकी सहायता शामिल है। हाई‑टेक क्षेत्र में सैटेलाइट और रक्षा तकनीक के साझा विकास की भी संभावनाएँ उजागर की गईं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत‑रूस संबंध 1950 के दशक से रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। शीत युद्ध के बाद भी दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा और विज्ञान के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा किया है। पिछले दशक में व्यापार में झटके के बाद, 2020‑2024 के बीच दोबारा गति लेने की कोशिशें जारी थीं, जो अब मोदी सरकार के व्यक्तिगत प्रयासों से तेज़ हुईं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that Modi’s direct diplomatic outreach is reshaping the Indo‑Russian economic landscape, positioning both nations for greater resilience amid Western sanctions on Moscow.

विश्लेषकों का मानना है कि मोदी की व्यक्तिगत कूटनीति ने भारत‑रूस व्यापार को पुनर्जीवित किया है।
Did You Know?: 1991 के बाद भारत‑रूस व्यापार में 30‑से‑40 प्रतिशत की गिरावट आई थी, जो अब दो दशकों में पहले से अधिक है।

Frequently Asked Questions

Q1: क्या अगली बार मोदी और पुतिन शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में मिलेंगे?

A: पुतिन ने संकेत दिया है कि इस वर्ष के SCO शिखर में दोनो नेताओं की मुलाकात संभव है।

Q2: भारत‑रूस के बीच किन क्षेत्रों में नई परियोजनाएँ शुरू हो रही हैं?

A: ऊर्जा आपूर्ति, उर्वरक उत्पादन, परमाणु ऊर्जा तकनीक और हाई‑टेक रक्षा उपकरण प्रमुख हैं।