एक नई रिपोर्ट के अनुसार, इज़राइल के रक्षा मंत्रालय और हथियार कंपनियों ने अमेरिकी शीर्ष विश्वविद्यालयों को हथियार विकास के लिए कई करोड़ डॉलर अनजाने में भेजे हैं। यह वित्तीय प्रवाह अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों की अनुसंधान स्वतंत्रता को चुनौती देता है।
- इज़राइल ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों को हथियार शोध के लिए करोड़ों डॉलर फंड किए।
- हावर्ड, कोलंबिया सहित कई प्रमुख संस्थानों को अनिर्दिष्ट धन प्राप्त हुआ।
- यह फंडिंग अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा और शैक्षणिक स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है।
एक हालिया जाँच रिपोर्ट ने उजागर किया कि इज़राइल के रक्षा मंत्रालय और उसके हथियार निर्माताओं ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों को सीधे या माध्यमिक संगठनों के ज़रिए बड़े पैमाने पर धनराशि भेजी। रिपोर्ट के अनुसार, 2015 से 2022 के बीच लगभग 150 मिलियन डॉलर इस प्रकार के शोध को समर्थन देने के लिए उपयोग किए गए।
हावर्ड, कोलंबिया, मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) और कई अन्य शीर्ष संस्थानों को इस फंडिंग के लाभार्थी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इन विश्वविद्यालयों ने एयरोस्पेस, साइबर सुरक्षा और उन्नत प्रोजेक्टाइल तकनीक जैसे क्षेत्रों में शोध किया, जो सीधे इज़राइल की रक्षा रणनीति से जुड़ा है।
धनराशि को अक्सर "सहयोगात्मक अनुसंधान" या "सिविल सॉफ्टवेयर विकास" के रूप में वर्गीकृत किया गया, जिससे यह पहचानना कठिन हो गया कि वास्तविक उद्देश्य सैन्य अनुप्रयोग है या नहीं। कई मामलों में फंडिंग को अमेरिकी फ़ाउंडेशन या निजी दान के माध्यम से छुपाया गया, जिससे पारदर्शिता की कमी स्पष्ट हुई।
अमेरिकी अकादमिक समुदाय में इस खुलासे पर मिश्रित प्रतिक्रिया देखी गई है। कुछ वैज्ञानिकों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग शोध को समृद्ध करता है, जबकि कई ने इस प्रकार की फंडिंग को राष्ट्रीय सुरक्षा और नैतिकता के मुद्दों के रूप में चिन्हित किया। कांग्रेस के कई सदस्यों ने इस पर सुनवाई की माँग की है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग का इतिहास लंबा है। 1980 के दशक से दोनों देशों ने मिलिट्री टेक्नोलॉजी, ड्रोन्स और सायबर सुरक्षा में संयुक्त शोध परियोजनाएँ चलायी हैं। इस सहयोग ने अक्सर अमेरिकी विश्वविद्यालयों को फंडिंग के माध्यम से लाभ पहुंचाए हैं, लेकिन इस बार फंड की मात्रा और गोपनीयता स्तर पहले से अधिक है।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि इस प्रकार का गुप्त वित्तीय प्रवाह न केवल शैक्षणिक स्वतंत्रता को खतरे में डालता है, बल्कि अमेरिकी नीति निर्माताओं के लिए भी जटिल चुनौतियाँ पेश करता है। यह सवाल उठाता है कि क्या अमेरिकी संस्थानों को विदेशी सैन्य फंडिंग स्वीकार करने के लिए सख्त नियमों की आवश्यकता है।
"विदेशी सैन्य फंडिंग के बिना पारदर्शी शैक्षणिक शोध संभव नहीं है, लेकिन इसे सार्वजनिक जांच के बिना छुपाना लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है," कहा प्रोफेसर अली शहाब, राष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञ।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या सभी फंडिंग सीधे इज़राइल की सेना से आती है?
उत्तर: नहीं, कई बार यह फंडिंग थर्ड‑पार्टी कंपनियों या अमेरिकी फ़ाउंडेशन के नाम पर प्रवाहित की जाती है, जिससे स्रोत का पता लगाना कठिन हो जाता है।
प्रश्न 2: क्या इस फंडिंग पर कोई कानूनी कार्रवाई हो रही है?
उत्तर: अभी तक कोई स्पष्ट कानूनी प्रकरण नहीं है, लेकिन कांग्रेस और कई विश्वविद्यालयों ने इस मुद्दे पर जांच की मांग की है।