आंध्र प्रदेश में दो प्रमुख भर्ती विवाद – मेगा डीएससी‑2025 शिक्षक चयन और एपीपीएससी ग्रुप‑I 2018 परीक्षा – ने जन‑ज़ी की चिंताओं को राजनीति के केंद्र में ला दिया है। उम्मीदवार अब इस बात की जाँच चाहते हैं कि प्रक्रिया वास्तव में न्यायसंगत थी या नहीं।
- मेगा डीएससी‑2025 में 16,347 शिक्षक पदों के लिए 5.7 लाख से अधिक आवेदनों का बौछार हुआ।
- हाई कोर्ट में 335 याचिकाएँ दायर हुईं, जिनमें 69 खेल कोटा से संबंधित हैं।
- शासक टीडीपी और विपक्षीय YSRसीपी दोनों ही जन‑ज़ी को जुटाने के लिए इन विवादों का उपयोग कर रहे हैं।
आंध्र प्रदेश में दो भर्ती विवाद – मेगा जिला चयन समिति (डीएससी)‑2025 शिक्षक भर्ती और 2018 एपीपीएससी ग्रुप‑I परीक्षा – राजनीतिक चर्चा के मुख्य विषय बन गए हैं। जबकि पार्टियाँ अपनी-अपनी कथा को आगे बढ़ाने में लगी हैं, उम्मीदवारों की असली चिंता यह है कि चयन प्रक्रिया निष्पक्ष थी या नहीं।
मेगा डीएससी‑2025 में सरकार ने 16,347 शिक्षक पदों की घोषणा की, जिसके लिए 5.7 लाख से अधिक आवेदक आए। 6 जून से 2 जुलाई 2025 के बीच परीक्षा आयोजित हुई और अंततः 15,941 उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश मिले, जबकि 406 पद खाली रह गए क्योंकि योग्य उम्मीदवार नहीं मिल सके। सरकार का कहना है कि सभी नियम, आरक्षण सूची और सरकारी आदेशों का पालन किया गया।
हालांकि, हाई कोर्ट में इस भर्ती को लेकर लगातार याचिकाएँ दायर की जा रही हैं। अगस्त 2026 तक कुल 335 याचिकाएँ दर्ज हुई हैं, जिनमें 69 खेल कोटा से संबंधित हैं। अदालत ने अब तक कोई ठहराव नहीं दिया और कहा कि मौजूदा प्रक्रिया में कोई स्पष्ट उल्लंघन नहीं दिखा।
विपक्षीय YSRसीपी ने इस विवाद को युवा आंदोलन के रूप में पेश कर जन‑ज़ी की चिंताओं को भुनाने की कोशिश की है। उन्होंने शिक्षा मंत्री नारा लोकेश पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं का आरोप लगाया और जवाबदेही की मांग की।
विवाद के मुख्य बिंदुओं में एक ही संस्थान को प्रश्न‑बैंक बनाने और परीक्षा आयोजित करने का अधिकार देना शामिल है। राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SERCET) के आउटसोर्स्ड कर्मचारी पी. Naveen का पहला मेरिट सूची में शामिल होना और बाद में हट जाना इस मुद्दे को और जटिल बनाता है, जिससे प्रश्न उठता है कि परीक्षा प्रणाली के अंदर प्रश्न‑बैंक तक पहुँच संभव थी या नहीं।
खेल कोटा विवाद ने भी नई परतें जोड़ी हैं। गठबंधन सरकार ने मेधावी खिलाड़ियों के लिए आरक्षण को 3% तक बढ़ाने का आदेश दिया, जिससे प्रत्यक्ष भर्ती में प्रतिस्पर्धात्मक परीक्षा के बिना क्षैतिज आरक्षण मिला। बाद में जब परीक्षा फिर से आयोजित करने का आदेश आया, तो यह कदम गंभीर आलोचना का विषय बना।
टीडीपी और उसके सहयोगी इस बीच एपीपीएससी ग्रुप‑I 2018 भर्ती विवाद को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। 2018 में जारी नोटिफिकेशन के तहत 169 ग्रुप‑I पदों को भरना था, लेकिन मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन को लेकर कई मुकदमों का सामना करना पड़ा। मार्च 2024 में एकल न्यायाधीश ने, तब YSRसीपी सत्ता में था, मूल्यांकन को अवैध ठहराते हुए मुख्य परीक्षा को फिर से लिखने का आदेश दिया।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that beyond party rivalries, the credibility of state recruitment drives directly influences the trust Gen‑Z places in democratic institutions. If candidates perceive bias, it could erode confidence in future government initiatives.
"भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने से न केवल युवा वर्ग निराश होगा, बल्कि राज्य की विकासात्मक क्षमता भी बाधित होगी," कहते हैं राजनीतिक विश्लेषक डॉ. रमेश कुमार।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: मेगा डीएससी‑2025 भर्ती का अंतिम परिणाम क्या रहा?
उत्तर: 15,941 उम्मीदवारों को नियुक्ति आदेश मिला, जबकि 406 पद योग्य उम्मीदवारों की कमी के कारण खाली रह गए।
प्रश्न 2: एपीपीएससी ग्रुप‑I 2018 मामले में न्यायालय ने क्या फैसला सुनाया?
उत्तर: हाई कोर्ट ने मुख्य परीक्षा के दूसरे और तीसरे मूल्यांकन को अवैध करार दिया और परीक्षा को पुनः आयोजित करने का आदेश दिया।