2026 में पारित हुए खनिज अधिनियम संशोधन ने केंद्र को सभी खनिज करों का नियंत्रण दे दिया है, जिससे राज्यों की आय में 10‑20% तक की गिरावट का खतरा है। यह कदम संघीय वित्तीय व्यवस्था और संविधानिक अधिकारों पर बड़ा प्रश्न उठाता है।

  • MMDR 2026 संशोधन से केंद्र को सभी खनिज करों का पूर्ण नियंत्रण मिला।
  • राज्य सरकारें अपनी वार्षिक आय का 10‑20% तक खो सकती हैं।
  • संविधानिक और वित्तीय संघवाद के लिए गंभीर जोखिम उत्पन्न।

माइन्स एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 (MMDR) और उसके बाद के संशोधनों ने धीरे‑धीरे राज्य सरकारों को अपने सीमाओं में प्रमुख खनिजों के दोहन का अधिकार से वंचित कर दिया है। 2026 के नवीनतम संशोधन ने इस प्रक्रिया को पूर्णतः समाप्त कर दिया, जिससे केंद्र को खनिज कर और खनिज‑भूमि कर पर पूर्ण अधिकार मिल गया।

पिछले पाँच दशकों में यह समझौता था कि केंद्र खनिजों के लाइसेंस आवंटित करेगा, जबकि राज्य इन पर कर लगा सकेंगे—एक अनौपचारिक, लेकिन कार्यशील, संघीय समझौता। अब यह समझौता पूरी तरह टूट चुका है, और यह बदलाव कई राज्यों की वार्षिक आय में 10‑20% की कमी का कारण बन सकता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1950 के दशक में बी.सी. रॉय ने कोल को लेकर पोलैंड की यात्रा की थी, जिससे भारत में कोयला‑आधारित औद्योगीकरण का विचार उभरा। उस समय कोयला उद्योग राष्ट्रीयकृत नहीं था और राज्य सरकारें प्रमुख खनिजों पर अपना दावा रखती थीं। लेकिन समय के साथ, 1957 के MMDR ने इस अधिकार को क्रमशः केंद्र के हाथों में कर दिया, जिससे राज्य‑केन्द्र संघर्ष की नींव रखी गई।

वर्तमान में, इस संशोधन को संसद में मात्र पाँच मिनट (लोकसभा) और 40 मिनट (राज्यसभा) में चर्चा के बाद पारित किया गया, जिससे विधायी प्रक्रिया की गंभीरता पर प्रश्न उठते हैं। कई सांसदों ने इसे स्थायी समिति को भेजने की मांग की, लेकिन उनका अनुरोध नजरअंदाज किया गया।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that the erosion of state fiscal autonomy could destabilize India's federal structure, discouraging investment in mining‑dependent states and igniting regional political tensions.

"राज्य की वित्तीय स्वतंत्रता के बिना, भारत का संघीय मॉडल अपनी बुनियादी स्थिरता खो सकता है," कहा गया एक संवैधानिक विशेषज्ञ ने।
Did You Know?: चीन ने 1994 में अपने वित्तीय प्रबंधन को केंद्रीकृत किया, लेकिन प्रांतों को पूँजी बाजार तक सीधी पहुँच देकर विकास को गति दी।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: इस संशोधन से कौन‑से राज्य सबसे अधिक प्रभावित होंगे?
उत्तर: खनिज‑समृद्ध राज्य जैसे झारखंड, ओडिशा और कर्नाटक को सबसे अधिक राजस्व में कटौती का सामना करना पड़ सकता है।

प्रश्न 2: क्या यह संशोधन संवैधानिक रूप से चुनौती योग्य है?
उत्तर: हाँ, 2024 के सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद राज्य‑केन्द्र कर अधिकारों को सीमित करना संभावित रूप से असंवैधानिक माना जा सकता है।