पुणे के मंजारि गांव में आदिवासी छात्रों ने दो हफ्ते से सरकारी असंतोष जताते हुए भूख हड़ताल जारी रखी है। वे बेहतर शिक्षा, होस्टल सुविधाएँ और सुप्रीम कोर्ट के रोजगार आदेश का कार्यान्वयन चाहते हैं।
- आदिवासी छात्रों ने 16 दिन तक भूख हड़ताल की
- सुप्रीम कोर्ट के 2017 के रोजगार आदेश का कार्यान्वयन माँगा
- सरकार ने केवल एक मांग – आयु सीमा हटाना – स्वीकार की
मंजारि गांव, पुणे के बाहरी इलाके में स्थित शेड्यूल्ड ट्राइब (एसटी) होस्टल में लगभग 70‑80 जनजातीय छात्र 12 अगस्त से लगातार भूख हड़ताल कर रहे हैं। वे कहते हैं कि महाराष्ट्र सरकार ने पिछले कई सालों से उनकी आवाज़ नहीं सुनी, जबकि वे पहली पीढ़ी के कॉलेज‑गोअर हैं।
छात्रों की मुख्य माँगें स्पष्ट हैं: बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता, आधुनिक होस्टल इन्फ्रास्ट्रक्चर, स्वच्छ किचन और पढ़ने के कमरे, तथा 2017 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्देशित 12,500 सरकारी नौकरियों का आवंटन। वे यह भी चाहते हैं कि 2017 के आदेश के तहत आरक्षित पदों का भरपूर उपयोग हो, जिससे उनके भविष्य में स्थिरता आए।
सरकार ने अब तक चार बार मंजारि में छात्रों के साथ चर्चा की है। 14 माँगों में से केवल एक – होस्टल में आयु सीमा को हटाना – को स्वीकार किया गया है। बाकी माँगों के लिए छात्रों ने आशावादी स्वर रखा है, यह मानते हुए कि निरंतर दबाव से उन्हें मंज़ूरगी मिलेगी।
राहुल गांधी के 22 अगस्त के पुणे दौरे के बाद स्थिति में हल्की सी हलचल आई। उनके “छात्रों की गूँज” रैली में उन्होंने छात्रों को मंच दिया और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस को पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने होस्टल की आयु सीमा हटाने की माँग को दोहराया। इस कदम से सरकार ने आयु सीमा को हटा दिया, लेकिन अन्य माँगें अभी भी लंबित हैं।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that the protest highlights systemic neglect of tribal education in Maharashtra, a state that contributes significantly to India’s industrial output. If these demands remain unmet, the region risks widening socio‑economic gaps, potentially fueling unrest in other marginalized communities.
"Education is the most potent tool for tribal upliftment; denying it perpetuates historic injustices," says Dr. Anjali Rao, sociologist at Pune University.
प्रदर्शन स्थल पर कई सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों की टीमें भी आईं, जिन्होंने समर्थन व्यक्त किया। महिलाओं ने भी प्रतिदिन लगभग 4 किलोमीटर चलकर इस हड़ताल में भाग लिया, जबकि कभी‑कभी बिजली और पानी की कमी भी रही।
हड़ताल के दौरान छात्रों की स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए दो छात्रों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। मेडिकल स्टाफ ने उनके जीवन संकेतों की लगातार निगरानी की, जबकि अन्य छात्र कफ़ी और धूप से बचने के लिए ब्लू फैन का उपयोग कर रहे थे।
Frequently Asked Questions
Q1: सुप्रीम कोर्ट के 2017 के आदेश को लागू करने में सरकार की मुख्य बाधाएँ क्या हैं?
A: मुख्य बाधाएँ बजट आवंटन, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और स्थानीय प्रशासन की अकार्यक्षमता हैं।
Q2: अगर सरकार इन माँगों को नहीं मानती तो आगे क्या कदम उठाए जा सकते हैं?
A: छात्र अधिक बड़े पैमाने पर धरना, राष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाना और न्यायालय में याचिका दायर करने की संभावना रखते हैं।